कनाडा में डिज़ाइन, डेनमार्क में विंड टेस्टिंग के दावों के बीच पहली ही बारिश में धंसा स्लैब,6,695 करोड़ के मुंबई-पुणे 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट पर भूस्खलन से मचा बवाल
मुंबई। देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 6,695 करोड़ रुपये के 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे। उद्घाटन के समय कहा गया था कि इस आधुनिक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट का डिज़ाइन कनाडा में तैयार किया गया, जबकि इसकी विंड टेस्टिंग डेनमार्क में की गई। यहां तक दावा किया गया कि यह संरचना 240 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं और अत्यधिक मौसमीय दबाव को झेलने में सक्षम है।
लेकिन प्रोजेक्ट के उद्घाटन के महज दो महीने बाद ही मानसून ने इन दावों की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारी बारिश के बीच 6 जुलाई 2026 की सुबह मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए 'मिसिंग लिंक' सेक्शन पर टनल-2 के समीप बड़ा भूस्खलन हो गया, जिसके चलते मार्ग को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार सोमवार तड़के करीब चार बजे खंडाला एग्जिट के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। भारी मलबे और विशाल चट्टानों के दबाव से टनल के प्रवेश द्वार पर निर्मित सुरक्षात्मक आरसीसी स्लैब (RC Slab) तथा रिटेनिंग वॉल का हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर ढह गया। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने तत्काल यातायात रोक दिया और मलबा हटाने का अभियान शुरू किया।
करीब 19 घंटे तक चले राहत एवं सफाई अभियान के बाद मार्ग को दोबारा वाहनों के लिए खोल दिया गया। हालांकि घटना ने निर्माण की गुणवत्ता, भू-तकनीकी अध्ययन और पहाड़ी क्षेत्रों में अवसंरचना परियोजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने घटना को "एक्ट ऑफ गॉड" करार देते हुए कहा है कि क्षेत्र में लगभग 760 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। निगम के अधिकारियों का कहना है कि मुख्य टनल संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और केवल प्रवेश द्वार के बाहरी हिस्से को नुकसान पहुंचा है।
उधर, सोशल मीडिया पर लोगों ने विदेशी डिज़ाइन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षण प्रक्रियाओं से जुड़े दावों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कई यूजर्स का कहना है कि यदि परियोजना को अत्यधिक मौसमीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, तो पहली ही गंभीर मानसूनी परीक्षा में सुरक्षात्मक संरचनाओं का क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है।
महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि मौसम सामान्य होने के बाद विशेषज्ञों की टीम पहाड़ी, रिटेनिंग संरचनाओं और निर्माण कार्य का विस्तृत तकनीकी अध्ययन करेगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नुकसान केवल प्राकृतिक कारणों से हुआ या निर्माण से जुड़े अन्य पहलुओं की भी इसमें भूमिका रही है।
गौरतलब है कि 1 मई 2026 को उद्घाटित किए गए इस 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट को मुंबई और पुणे के बीच यात्रा समय कम करने तथा यातायात को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना गया था। लेकिन मानसून की पहली बड़ी चुनौती ने इस बहुचर्चित परियोजना को नए सिरे से जांच के दायरे में ला खड़ा किया है।