Oct 04, 2026 Login

वारदात: ‘दृश्यम’ देखकर बेटे ने रची पिता की हत्या की साजिश! 2000 किमी दूर से पहुंचा गांव, वारदात के बाद लौट गया शहर! मोबाइल ऑन करते ही खुल गया पूरा राज

Crime: Son plots father's murder after watching 'Drishyam'! Traveled 2,000 km to the village and returned to the city after the crime; the whole plot was exposed the moment he switched on his mobile.

समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर से एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसमें एक बेटे ने फिल्म ‘दृश्यम’ से प्रेरित होकर अपने ही पिता की हत्या की साजिश रची। पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब 2000 किलोमीटर दूर गुजरात के सूरत में रह रहा था और वहीं से ट्रेन पकड़कर अपने गांव पहुंचा। रात के अंधेरे में उसने घर के बाहर सो रहे पिता की हत्या कर दी और वारदात के बाद वापस सूरत लौट गया। आरोपी को भरोसा था कि फिल्म की तरह पुलिस को उसके खिलाफ कोई ठोस सुराग नहीं मिलेगा, लेकिन उसकी एक छोटी सी चूक ने पूरी कहानी पलट दी। मोबाइल फोन कुछ देर के लिए ऑन करना ही पुलिस के लिए ऐसा सुराग बन गया, जिसके आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई गई। मामला समस्तीपुर जिले के हलई थाना क्षेत्र के दरवा गांव का है। यहां 26 जुलाई की देर रात रघुवीर सहनी की हत्या कर दी गई थी। वह घर के दरवाजे पर सो रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जबकि घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच के लिए एफएसएल टीम को भी बुलाया गया। पुलिस की शुरुआती जांच में यह आशंका सामने आई कि वारदात किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि परिवार या परिचित व्यक्ति ने की है। इसके बाद पुलिस ने मृतक के परिवार और करीबियों की गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। तकनीकी जांच के साथ-साथ पुराने विवादों और संदिग्ध गतिविधियों को भी खंगाला गया। इसी दौरान पुलिस का शक मृतक के बेटे शिव शंकर पर गहराने लगा। पुलिस के अनुसार, शिव शंकर का अपने पिता के साथ जमीन बेचने को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि पारिवारिक विवाद और पिता के व्यवहार को लेकर भी दोनों के बीच तनाव था। इसी वजह से शिव शंकर अपनी पत्नी के साथ सूरत में रहने लगा था। पुलिस पूछताछ में शिव शंकर ने कथित तौर पर बताया कि सूरत में रहने के दौरान उसने फिल्म ‘दृश्यम’ देखी थी। फिल्म से प्रभावित होकर उसके मन में पिता की हत्या की योजना बनी। इसके बाद उसने वारदात को अंजाम देने के लिए गांव जाने का फैसला किया। पुलिस के मुताबिक, शिव शंकर ने यात्रा शुरू करने से पहले अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था, ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। वह ट्रेन से पहले पटना पहुंचा और फिर हाजीपुर से ट्रेन पकड़कर पटोरी स्टेशन पहुंचा। वहां से ऑटो के जरिए जोरपुरा गया और इसके बाद करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर रात में अपने घर पहुंचा। पुलिस के अनुसार, आरोपी पीछे के रास्ते से घर में दाखिल हुआ। इसके बाद उसने घर में रखी कुल्हाड़ी उठाई और बाहर सो रहे अपने पिता पर हमला कर दिया। वारदात के बाद आरोपी ने हथियार भी घर में ही छोड़ दिया और रात में वहां से निकल गया। पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद शिव शंकर दोबारा पटोरी स्टेशन की ओर रवाना हुआ। उसका मकसद जल्द से जल्द गांव से निकलकर वापस सूरत पहुंचना था, ताकि पुलिस को उस तक पहुंचने का कोई रास्ता न मिले।

फिल्मी प्लान में मोबाइल बना सबसे बड़ा सुराग
शिव शंकर ने पुलिस की नजर से बचने के लिए मोबाइल फोन बंद रखा था, लेकिन यही योजना उस समय कमजोर पड़ गई जब पटोरी स्टेशन पहुंचने के बाद उसने अपना मोबाइल फोन ऑन कर दिया। पुलिस के मुताबिक, उसने अपनी पत्नी से फोन पर बातचीत भी की और इसके बाद मोबाइल दोबारा बंद कर दिया। यही छोटी सी गलती जांच में निर्णायक सुराग बन गई। तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को हत्या वाली रात पटोरी स्टेशन के आसपास उसके मोबाइल की लोकेशन मिली। इसके बाद पुलिस ने उस दौरान हुई बातचीत और कॉल डिटेल को खंगाला। जांच में यह भी सामने आया कि इसके करीब 36 घंटे बाद उसी मोबाइल की लोकेशन सूरत में मिली। पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल को जांच के दूसरे पहलुओं से जोड़कर देखा। इससे पुलिस का शक और मजबूत होता गया। जांच एजेंसी ने आरोपी की गतिविधियों और उसके सूरत लौटने की जानकारी जुटाई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आखिरकार शिव शंकर तक पहुंच बनाई। इसके बाद पुलिस टीम ने सूरत जाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ के आधार पर हत्या की पूरी परिस्थितियों और वारदात में इस्तेमाल किए गए अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, पिता की हत्या के बाद शिव शंकर उनके श्राद्ध कर्म में भी शामिल नहीं हुआ था। इससे जांच के दौरान उस पर शक और गहरा गया। हालांकि, पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़कर आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

‘दृश्यम’ जैसा प्लान, लेकिन मोबाइल ने खोल दिया राज
पुलिस की जांच में सामने आई कहानी का सबसे अहम पहलू यह है कि आरोपी ने कथित तौर पर फिल्म ‘दृश्यम’ से प्रेरणा लेकर पुलिस को गुमराह करने की योजना बनाई थी। उसने मोबाइल बंद रखा, लंबी दूरी तय की और रात में गांव पहुंचकर वारदात को अंजाम देने के बाद वापस लौट गया। उसे उम्मीद थी कि पुलिस के पास उसके खिलाफ कोई ठोस सुराग नहीं होगा। लेकिन पटोरी स्टेशन पर कुछ समय के लिए मोबाइल फोन ऑन करना उसकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। इसी दौरान हुई फोन कॉल और मोबाइल लोकेशन ने जांच की दिशा बदल दी। तकनीकी साक्ष्यों के जरिए पुलिस ने सूरत तक उसकी गतिविधियों को जोड़ा और आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी साफ हुआ कि अपराध की योजना कितनी भी सुनियोजित क्यों न हो, तकनीकी जांच के दौर में छोटी सी चूक भी जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बन सकती है।