बड़ी खबरः मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'इंडिया' ब्लॉक का प्रतीकात्मक महाभियोग! खरगे बोले- सरकारों को गिराने के बाद अब वोटों की हो रही चोरी, वोटर लिस्ट से नाम कटने वाले नागरिकों ने बयां किया दर्द
नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन ने शनिवार को राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम का आयोजन किया। इस 'मॉक पार्लियामेंट' में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर सांठगांठ का सीधा आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से सत्ता पर काबिज रहने के लिए हर हथकंडा अपनाया गया, पहले सांसदों की खरीद-फरोख्त हुई, क्षेत्रीय दलों को तोड़ा गया, चुनी हुई सरकारें गिराई गईं और अब सीधे तौर पर जनता के 'वोटों की चोरी' की जा रही है। लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रतीकात्मक महाभियोग में खरगे ने वर्ष 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में संसद से विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित करके यह कानून पारित कराया गया था, जो चुनाव आयुक्तों को कानूनी जवाबदेही से आजीवन सुरक्षा कवच प्रदान करता है। खरगे ने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सात महीने पहले दोनों सदनों के 193 सांसदों ने सीईसी को हटाने के लिए विधिवत नोटिस दिया था, लेकिन उसे बिना किसी विचार के खारिज कर दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वायत्तता की रक्षा के लिए है। कांग्रेस अध्यक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में बैठकर तकनीक और कंप्यूटर के जरिए योजनाबद्ध तरीके से कमजोर तबकों, महिलाओं और युवाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान उन आम नागरिकों को भी मंच पर अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिनके नाम हालिया मतदाता सूचियों से काट दिए गए हैं। कोलकाता से दिल्ली आकर बसीं सिंगल मदर अनीता जायसवाल ने रोष जताते हुए कहा कि वर्ष 2012 में उनका पहचान पत्र बना था और वे लगातार मतदान करती रही हैं, लेकिन अब उनका नाम सूची से गायब कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार साबित करे कि वे किस देश की नागरिक हैं और प्रशासन को वैध पहचान पत्र खारिज करने का अधिकार किसने दिया। वहीं, पश्चिम बंगाल के इफ्तिखार अहमद ने भी अपना नाम मतदाता सूची से काटे जाने का मुद्दा उठाया। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे बाण चलाए। तेजस्वी ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर संस्थाओं का दुरुपयोग कर जनता के मताधिकार छीने जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं खोखली हो रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि देश का विपक्ष और आम नागरिक इस साजिश को समझ चुका है और लोकतंत्र पर यह डाका किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।