Oct 31, 2026 Login
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उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: टेक्निकल यूनिवर्सिटी और संबद्ध संस्थानों में नियमित फैकल्टी नियुक्तियों पर 6 महीने में लें निर्णय

Major ruling by Uttarakhand High Court: Take a decision within 6 months regarding the appointment of regular faculty at the technical university and its affiliated institutions.

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध संस्थानों में शॉर्ट टर्म एंगेजमेंट (संविदा) फैकल्टी की नियुक्तियों और उनके भविष्य से जुड़ी अनिश्चितता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि यूनिवर्सिटी द्वारा जनवरी 2026 में नियमित भर्ती के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर आगामी छह महीने के भीतर निर्णायक कार्रवाई की जाए और नियमित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को गति दी जाए।

उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध संस्थानों में लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को विश्वविद्यालय की ओर से जनवरी 2026 में नियमित भर्ती के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर छह महीने के भीतर निर्णायक कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही नियमित फैकल्टी की नियुक्ति के लिए आवश्यक प्रक्रिया और कदम भी इसी समयावधि में पूरे करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद विश्वविद्यालय और संबद्ध संस्थानों में शिक्षकों की नियमित नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता दूर होने की उम्मीद जगी है। मामला शॉर्ट टर्म एंगेजमेंट फैकल्टी के रूप में नियुक्त शिक्षकों की सेवा और रोजगार की स्थिरता से जुड़ा है। याचिकाकर्ता आशीष गोपेश्वर स्थित एक संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। याचिका के अनुसार, वर्ष 2023-24 के दौरान उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति 11 महीने के अनुबंध पर शॉर्ट टर्म एंगेजमेंट फैकल्टी के रूप में की गई थी। इसके बाद शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए नए विज्ञापन जारी कर नई नियुक्तियां की गईं। हालांकि, याचिकाकर्ता का कहना था कि 2025-26 और 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बजाय पहले से नियुक्त शिक्षकों को ही लगातार सेवा विस्तार दिया जाता रहा। याचिका में तर्क दिया गया कि इस व्यवस्था के चलते शिक्षकों के भविष्य और रोजगार को लेकर असमंजस बना हुआ है। हर बार अनुबंध और सेवा विस्तार पर निर्भर रहने से उन्हें स्थायी रोजगार की सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि शॉर्ट टर्म एंगेजमेंट फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में पारदर्शी तरीके से अपनाई जाए अथवा इन पदों पर नियमित भर्ती की जाए। इससे शिक्षकों को रोजगार की स्थिरता के साथ बेहतर वेतनमान मिलने का रास्ता खुल सकेगा। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए सरकार को स्पष्ट समयसीमा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से जनवरी 2026 में शासन को भेजे गए नियमित भर्ती के प्रस्ताव पर छह महीने के भीतर निर्णायक निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही नियमित फैकल्टी की नियुक्ति के लिए जरूरी प्रक्रिया भी इसी अवधि में आगे बढ़ाई जाए। हाईकोर्ट के निर्देशों से अब सरकार और विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी बढ़ गई है। शिक्षकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नियमित भर्ती के प्रस्ताव पर शासन कब तक फैसला लेता है और नियुक्ति प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। तकनीकी शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक व्यवस्था के लिहाज से भी यह मामला महत्वपूर्ण है। हालांकि, कोर्ट के आदेश का अर्थ तत्काल नियुक्तियां होना नहीं है, बल्कि सरकार को निर्धारित छह महीने में प्रस्ताव पर निर्णायक कार्रवाई और नियमित भर्ती की आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।