वोट चोरी और मतदाता सूची में धांधली के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल: सड़क पर उतरे कांग्रेसी,रुद्रपुर में पैदल मार्च के बाद ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन
रुद्रपुर। मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' के गंभीर आरोपों को लेकर उत्तराखंड सहित देशभर में कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को ऊधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विशाल पैदल मार्च निकाला,इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन किया और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन उत्तराखंड में तेज हो गया है। सोमवार को ऊधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश शहर प्रभारी मनोज यादव और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में पैदल मार्च निकाला। सिटी क्लब से शुरू हुआ मार्च डीडी चौक तक पहुंचा, जहां कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के अधिकारी को सौंपा। प्रदर्शन में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधायक नारायण पाल, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन, जिला कांग्रेस अध्यक्ष हिमांशु गावा समेत जिलेभर से आए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां थीं और वे मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों तथा एसआईआर प्रक्रिया को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग भी उठाई। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने दावा किया कि उत्तराखंड के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनमें बड़ी संख्या में फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। कांग्रेस ने इन शिकायतों की परिस्थितियों और प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता तथा पारदर्शिता पर करोड़ों मतदाताओं का भरोसा निर्भर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आर्य ने एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों की शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सुरक्षित रखना निर्वाचन व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने मांग की कि एसआईआर के दौरान सामने आई कथित प्रक्रियात्मक विसंगतियों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए। उन्होंने चुनाव आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग के भीतर असहमति के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। कांग्रेस ने एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों को लेकर उत्तराखंड के कई जिलों में प्रदर्शन किए हैं। देहरादून में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में निर्वाचन कार्यालय का घेराव और पुतला दहन किया गया था। पार्टी ने जिला स्तर पर भी विरोध कार्यक्रमों का आह्वान किया है। वहीं, निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार उत्तराखंड एसआईआर-2026 की प्रक्रिया में ड्राफ्ट मतदाता सूची 14 जुलाई को प्रकाशित की गई थी और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ी। आयोग मतदाताओं को नाम खोजने, सुधार कराने और मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करने की ऑनलाइन सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा है। फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में प्रस्तावित नाम हटाने पर आपत्ति के लिए किया जाता है। कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच अब एसआईआर की प्रक्रिया, फॉर्म-7 से जुड़ी शिकायतों और मतदाता सूची में नामों को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ही इन आरोपों का अंतिम आकलन किया जा सकता है।