Oct 24, 2026 Login
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मायके से बरात लेकर ससुराल पहुंची दुल्हन, पैदल तय किया 18 किमी का सफर, शुभ मूहुर्त में पहुंचने को लहंगे में लगाई दौड़

A bride arrived at her in-laws' home accompanied by the wedding procession from her own family; she covered the 18 km journey on foot and even ran in her bridal lehenga to ensure she arrived at the a

देहरादून। एक तरफ जहां राज्य सरकार डिजिटल क्रांति और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे कर रही है,वहीं दूसरी ओर देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बाबर से आई एक तस्वीर ने व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है। चकराता ब्लॉक के अति-दुर्गम गांव उदावा में आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी आज तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। इस बुनियादी सुविधा के अभाव का खामियाजा ग्रामीणों को किस हद तक भुगतना पड़ रहा है, इसका ताजा उदाहरण एक अनोखी और दर्दभरी शादी के रूप में सामने आया है।

हाथों में मेहंदी, तन पर सुर्ख लहंगा और आंखों में नए जीवन के सपने लेकर जब एक दुल्हन अपने ससुराल की ओर चली, तो उसे उम्मीद रही होगी कि कुछ ही देर में गृह प्रवेश की रस्म पूरी हो जाएगी। लेकिन उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी गांव उदावा में सड़क नहीं होने की हकीकत ने उसकी शादी के यादगार पल को संघर्ष की कहानी में बदल दिया। बरात के साथ वाहन से लोखंडी तक पहुंची दुल्हन शर्मिला को अपने ससुराल पहुंचने के लिए करीब 18 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ा। लगभग चार घंटे तक पहाड़ी रास्ते पर चलने के बाद भी जब गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकलने की चिंता सताने लगी, तो दुल्हन ने लहंगा संभालते हुए दौड़ लगानी शुरू कर दी। यह मामला चकराता विकासखंड के उदावा गांव का है, जहां आजादी के दशकों बाद भी सड़क सुविधा नहीं पहुंच सकी है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों से लेकर शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मंगलवार को इस समस्या की तस्वीर उस समय सामने आई, जब उदावा निवासी अनिल चौहान की शादी बुल्हाड़ गांव की शर्मिला से हुई। शादी के बाद शर्मिला बरात के साथ वाहन से लोखंडी तक पहुंची। यहां से उदावा गांव तक सड़क नहीं होने के कारण उसे कच्चे और दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर पैदल चलना पड़ा। दुल्हन के परिजन और बराती भी इस सफर में साथ रहे। करीब 18 किलोमीटर की दूरी और चार घंटे की पैदल यात्रा ने शादी की खुशियों के बीच सड़क सुविधा की कमी को उजागर कर दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दुल्हन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गांव तक सड़क बनवाने की अपील करती दिखाई दे रही है। शर्मिला बताती है कि पैदल चलने के कारण वह काफी थक चुकी है। वहीं, गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकलने की चिंता के चलते उसे रास्ते में दौड़ना भी पड़ रहा है। दुल्हन ने यह भी बताया कि गांव तक पहुंचने वाला रास्ता पक्का नहीं है। उसने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उदावा गांव तक सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य दुल्हन, बुजुर्ग, मरीज या ग्रामीण को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। उदावा की यह घटना केवल एक शादी की परेशानी नहीं, बल्कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की चुनौती को सामने लाती है। सड़क किसी भी गांव के लिए आवागमन का साधन भर नहीं होती, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। शादी के जो पल यादगार होने चाहिए थे, उनमें दुल्हन को थकान, दुर्गम रास्ते और समय की चिंता से जूझना पड़ा। अब ग्रामीणों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि शर्मिला की अपील पर उदावा गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। सवाल यही है कि पहाड़ के इस गांव को सड़क सुविधा के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा?