सीएम धामी का रौद्र रूप: जनता की शिकायतों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, 22 हजार शिकायतें जबरन बंद करने पर अफसरों को दी सख्त चेतावनी

CM Dhami's Stern Stance: Tampering with Public Grievances Will Not Be Tolerated; Officers Issued a Strict Warning for Arbitrarily Closing 22,000 Complaints.

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नौकरशाही की लापरवाही और जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। सचिवालय में 'सीएम हेल्पलाइन 1905' की समीक्षा बैठक के दौरान जब मुख्यमंत्री के सामने यह तथ्य आया कि अफसरों ने बिना समाधान किए ही 22,246 शिकायतें जबरन बंद कर दी हैं, तो वे बेहद नाराज हो गए। सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना शिकायत बंद की गई, तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में शिकायत निस्तारण व्यवस्था में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा बैठक के दौरान सामने आया कि राज्य में कुल 22,246 शिकायतों को जबरन बंद कर दिया गया, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि जनता की शिकायतों के साथ इस तरह की लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। शुक्रवार को सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के सामने यह चौंकाने वाला आंकड़ा आया कि कुल 1,19,077 शिकायतों में से लगभग 18.68 प्रतिशत मामलों को बिना उचित समाधान के बंद कर दिया गया। इस पर सीएम धामी ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की अनुमति के बिना किसी भी शिकायत को बंद न किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1905 केवल एक फोन नंबर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का निस्तारण तब तक किया जाए जब तक शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट न हो जाए। साथ ही जिलाधिकारी स्तर पर साप्ताहिक और सचिव स्तर पर हर माह कम से कम दो बार समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

जिलेवार आंकड़ों में देहरादून में शहरी विकास से जुड़ी 6,084 और पेयजल विभाग की 2,980 शिकायतें सामने आईं। वहीं ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक रहीं, जबकि हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस विभाग शीर्ष पर रहे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ विभाग गंभीर शिकायतों को जानबूझकर दूसरी श्रेणियों में डालकर अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं। जल संस्थान के अधिकारियों द्वारा पानी की आपूर्ति से जुड़ी 861 शिकायतों को बिना समाधान बंद कर दिया गया। सिलिंडर रिफिल और राशन कार्ड जैसी समस्याओं को शिकायत मानने के बजाय ‘डिमांड’ की श्रेणी में डालकर टाल दिया गया। बिजली बिल और खराब मीटर जैसी समस्याएं भी तकनीकी कारणों में उलझाकर लंबित रखी गईं। सबसे चौंकाने वाला मामला जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह का रहा, जिनके पास 2,074 शिकायतें थीं, जिनमें से 2,043 (करीब 98.5%) को बिना ठोस समाधान बंद कर दिया गया। वहीं पर्यटन विकास अधिकारी ललित मोहन तिवारी 328 में से केवल 41 शिकायतों का ही निस्तारण कर सके। राज्य में 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें राजस्व विभाग (472), वन विभाग (445) और लोक निर्माण विभाग (401) शीर्ष पर हैं। कुछ शिकायतें तो वर्ष 2021 से ही लंबित पड़ी हैं। आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी-मार्च 2026 में लंबित शिकायतों में 107% और प्रक्रिया में चल रही शिकायतों में 2290% की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की सराहना भी की और उन्हें प्रेरित किया। स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री धामी अब शिकायत निस्तारण प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सख्त कदम उठाने के मूड में हैं, जिससे जनता का भरोसा कायम रखा जा सके।