मोदी सरकार: 12 साल में पहला बड़ा इस्तीफा! NEET बवाल ने तोड़ा 'नो रेजिग्नेशन' का रिकॉर्ड, प्रधान के जाते ही सोशल मीडिया पर छाए राजनाथ सिंह! वायरल हुआ 2015 का पुराना बयान

Modi Government: First major resignation in 12 years! The NEET controversy breaks the 'no resignation' record; Rajnath Singh takes over social media spotlight following Pradhan's exit! A 2015 stateme

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में शनिवार को एक ऐतिहासिक राजनीतिक घटनाक्रम दर्ज हुआ। नीट परीक्षा धांधली और देश भर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक प्रकरणों को लेकर मचे भारी बवाल के बीच आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही मोदी कैबिनेट में मंत्रियों के पद न छोड़ने का सालों पुराना सिलसिला और रिकॉर्ड आखिरकार टूट गया। शनिवार, 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपे जाने के बाद देश की राजनीति में एकाएक हड़कंप मच गया है। जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका था, जिसे सोनम वांगचुक जैसे प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी साथ मिला। धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की एक पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो क्लिप तेजी से वायरल होने लगी। यह वायरल वीडियो 24 जून 2015 का है, जब राजनाथ सिंह केंद्रीय गृह मंत्री थे। उस समय विपक्ष द्वारा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग पर राजनाथ सिंह ने बेहद आत्मविश्वास से कहा था, "मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं भैया, ये UPA सरकार नहीं है, NDA सरकार है।" बीते 12 वर्षों में मोदी सरकार ने इस छवि को बनाए रखा था और तमाम सियासी तूफानों के बावजूद किसी भी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री ने किसी विवाद के चलते अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था। हालांकि, लाखों छात्रों के आक्रोश और देशव्यापी जनदबाव के सामने यह रिकॉर्ड आखिरकार ध्वस्त हो गया। गौरतलब है कि इससे पहले 17 अक्टूबर 2018 को #MeToo अभियान के दौरान लगे आरोपों के चलते एमजे अकबर ने विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन किसी कैबिनेट मंत्री का विवादों के चलते इस्तीफा देने का यह पहला मामला है। नीट परीक्षा में हुई धांधली और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हफ्तों से विरोध प्रदर्शन जारी था। इस आंदोलन को तब बड़ी ताकत मिली जब लद्दाख के प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। सोनम वांगचुक ने शुक्रवार (24 जुलाई) को अपना अनशन समाप्त किया था। उनके अनशन समाप्त होते ही दिल्ली के सियासी गलियारों में कयासबाजी तेज हो गई थी कि सरकार अब बैकफुट पर आ चुकी है और शिक्षा मंत्रालय में बड़ा फेरबदल तय है। आखिरकार 24 घंटे के भीतर ही धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़कर इन अटकलों पर विराम लगा दिया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विपक्षी दलों ने छात्र शक्ति और प्रत्यक्ष लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत बताया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को अपनी नाकामी स्वीकार करनी पड़ी है। वहीं, आंदोलनकारी छात्रों और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि केवल मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं है, जब तक पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं आती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।