बड़ी खबरः उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर हाईकोर्ट सख्त! स्वास्थ्य सचिव को 12 अगस्त को किया तलब, डॉक्टरों के तबादलों और नई नियुक्तियों पर मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने सचिव स्वास्थ्य से 12 अगस्त को कोर्ट में पेश होने को कहा है। साथ में कोर्ट ने यह बताने को कहा है कि राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर डाक्टरों का स्थानांतरण किया जा रहा है, उनके स्थान पर नए डाक्टरों की नियुक्ति के लिए क्या उपाय किये जा रहे हैं, अपने सुझाव कोर्ट को दें। साथ ही कोर्ट ने नैनीताल के सेनेटोरियम हॉस्पिटल को सुपर स्पेसलिस्ट हॉस्पिटल बनाए जाने के लिए पूर्व में दिए गए निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। राज्य सरकार की ओर से आज फिर कहा गया कि इसके लिए 250 सौ करोड़ की डीपीआर बनाकर सरकार को भेज दिया है। जो बजट की स्वीकृति के लिए वित्त विभाग के पास है। बजट की स्वीकृति होने के बाद कार्य प्रारंभ किया जाएगा। जिसपर कोर्ट ने सरकार से एक सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र की तरफ से कहा गया कि राज्य सरकार ने बीते दिनों राजकीय मेडिकल कालेज सुशीला तिवारी के 16 वरिष्ठ डॉक्टर और बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से कई वरिष्ठ डॉक्टरों का स्थानांतरण कर दिया है, जिसकी वजह से दोनों अस्पतालों के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी जगह किसी अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति नही की गई। जबकि दोनों हॉस्पिटलों में रेफर के केस आते हैं। इसलिए उनके स्थानांतरण पर पुनः एक बार विचार किया जाए। स्थानांतरण होता भी है तो उनकी जगह स्पेसलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की जाय। जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। डाक्टरों का स्थानांतरण वहां किया जा रहा है जो हॉस्पिटल चालू नही हैं। जो हॉस्पिटल चालू हैं उनमें नियुक्ति नहीं की जा रही है।