सोनम वांगचुक के समर्थन में आए अन्ना हजारे! बोले- उनके सब्र की परीक्षा न ले सरकार, फिल्मी सितारे भी भड़के! लिखा- पर्दे के पीछे क्या है? 56 इंच का डरा हुआ नंगापन

Anna Hazare comes out in support of Sonam Wangchuk! Says the government should not test his patience; film stars are also outraged, asking—what lies behind the scenes? A frightened '56-inc

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद पूरे देश में इस घटनाक्रम को लेकर बहस तेज हो गई है। 20 दिनों से अनशन पर बैठे वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस बीच वरिष्ठ गांधीवादी नेता अन्ना हजारे ने सरकार को सलाह दी है कि वह इस पूरे मामले में चुप्पी तोड़े और आंदोलनकारियों से बातचीत का रास्ता अपनाए। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में संवाद ही हर समस्या का सबसे प्रभावी समाधान होता है। अन्ना हजारे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार उनकी सभी मांगें माने या न माने, लेकिन बातचीत अवश्य करनी चाहिए। उनका कहना था कि 20 दिनों तक लगातार अनशन करने वाले व्यक्ति के धैर्य और संयम की परीक्षा लेना उचित नहीं है। सरकार को अपनी बात भी रखनी चाहिए और आंदोलनकारियों की बात भी सुननी चाहिए। इसी प्रक्रिया से किसी भी विवाद का समाधान निकल सकता है। बता दें कि सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। शनिवार को उनका अनशन 21वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार केवल पानी के सहारे रहने और ठोस भोजन नहीं लेने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होने लगी। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर गई। सोनम वांगचुक और उनके समर्थन में आंदोलन कर रहे संगठनों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने देशभर के लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ा है। प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच, पेपर लीक मामलों की पारदर्शी जांच और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक छात्रों का विश्वास बहाल नहीं हो सकेगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो, भड़के फिल्मी सितारे
जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो पर आम लोगों के साथ-साथ फिल्म और टीवी जगत की कई हस्तियों ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। अभिनेता प्रकाश राज ने सरकार की आलोचना करते हुए एक्स पर लिखा कि पूरी दुनिया ऐसी सरकार को देख रही है जो युवाओं से संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता चुन रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन को बाधित करना और सोनम वांगचुक को जबरन हिरासत में लेना सरकार के डर और असुरक्षा का प्रतीक है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए बेहद शर्मनाक करार दिया। इसके बाद एक अन्य पोस्ट में उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए लिखा, "पर्दे के पीछे क्या है? 56 इंच का डरा हुआ नंगापन।" टीवी अभिनेत्री काम्या पंजाबी ने भी इस घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह इस पूरे घटनाक्रम से बेहद आहत, गुस्से में और स्तब्ध हैं। उनके अनुसार, लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर जवाबदेही मांगने के लिए सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति को तीन सप्ताह तक केवल पानी के सहारे अनशन करना पड़ा और अंततः उन्हें पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाना पड़ा। काम्या ने लिखा कि एक सच्चा लोकतंत्र अपने नागरिकों की आवाज सुनता है, उन्हें अपनी मांगों के लिए इस हद तक मजबूर नहीं करता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर देश आने वाली पीढ़ियों के लिए किस प्रकार का लोकतांत्रिक वातावरण तैयार कर रहा है। गायक और संगीतकार विशाल ददलानी ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी कायरता पहले कभी नहीं देखी। उनके अनुसार, सोनम वांगचुक को जिस तरह जबरन उठाकर अस्पताल ले जाया गया, उसने उनका दिल तोड़ दिया है। उन्होंने लोगों से जागरूक होने की अपील करते हुए कहा कि यदि अब भी देशवासी नहीं जागेंगे तो फिर कब जागेंगे। ददलानी ने कहा कि इस पूरी घटना को देखकर वह बेहद आक्रोशित और व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता मैं क्या कहूं, मैं सिर्फ ये सोच रहा हूं कि कैसे भी इसमें कुछ कर पाऊं। इस समय गुस्से से मेरा भेजा फट रहा है।’

लोकतंत्र, विरोध और संवाद पर नई बहस
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद यह मामला केवल एक स्वास्थ्य संबंधी विषय नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों, शांतिपूर्ण विरोध, सरकारी जवाबदेही और छात्रों के भविष्य से जुड़े बड़े सवालों का केंद्र बन गया है। एक ओर सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी और विपक्षी दल इसे शांतिपूर्ण आंदोलन पर कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं। अन्ना हजारे की अपील ने इस पूरे विवाद के बीच संवाद की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में किसी भी विवाद का स्थायी समाधान टकराव से नहीं बल्कि बातचीत और विश्वास के माहौल से ही निकल सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आंदोलनकारियों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करती है या नहीं, और सोनम वांगचुक की सेहत में कितना सुधार होता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।