संसद से सड़कों तक संग्राम: कांग्रेस का देशव्यापी हल्लाबोल, विपक्ष ने मांगी शिक्षा मंत्री की विदाई
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों तक इस वक्त सियासी पारा अपने चरम पर है। नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधलियों और न्याय की मांग कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई के विरोध में विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संसद परिसर से लेकर सड़कों तक विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है। तिरुवनंतपुरम, गुवाहाटी, जबलपुर और भुवनेश्वर में प्रदर्शन किए गए। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को दबा रही है। तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस और केरलम स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया।
संसद मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प अब संसद से लेकर देशभर की सड़कों तक राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गई है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले का आरोप लगाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। वहीं, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। बुधवार को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन का ऐलान किया है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को और तेज कर दिया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार 20 मार्च को संसद तक निकाले गए सीजेपी मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिस पर पत्थर और अन्य वस्तुओं से हमला किया तथा सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की। पुलिस का दावा है कि हिंसक भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचाया और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया। अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में वरिष्ठ अधिकारियों सहित कुल 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा 15 से 20 सरकारी वाहनों और अन्य सरकारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि सुरक्षाकर्मियों को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पड़े। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी है। उधर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली सहित कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में आयोजित किए गए। साथ ही संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी कड़ी निंदा की गई। तिरुवनंतपुरम, गुवाहाटी, जबलपुर और भुवनेश्वर सहित कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस और केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त प्रदर्शन कर पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इसी बीच कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है। अपने नोटिस में उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की मांग कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और एकत्र होने के मौलिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हिबी ईडन ने कहा कि संसद हजारों छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाओं पर मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती। उनके अनुसार छात्र देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में कथित कमियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे और उनकी मांगों को बल प्रयोग से दबाना उचित नहीं है। इस बीच विपक्षी सांसदों ने बुधवार सुबह 10:30 बजे संसद के मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस दौरान वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाएंगे। साथ ही नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और विपक्ष के आक्रामक रुख के बीच संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर पुलिस हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का मामला बताते हुए सरकार को लगातार घेर रहा है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति दोनों में गर्माया रहने के संकेत दे रहा है।