बनभूलपुरा हिंसा: आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई! हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, मास्टरमाइंड को आज भी नहीं मिली राहत

Banbhulpura case: Hearing on bail petitions of the accused! High Court reserved the decision, the mastermind did not get relief even today

नैनीताल। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा कांड के कई आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खण्डपीठ ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्णय सुरक्षित रख लिया है। हुई सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि सकील अंसारी जो पार्षद था, उसका इस दंगे में अहम भूमिका रही है। अन्य आरोपियों के द्वारा दंगे में शामिल होकर सरकारी सम्पति व कर्मचारियों पर पथराव और आगजनी की। इसलिए इनकी जमानत याचिकाएं निरस्त की जाएं। लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। आज इस मामले में अब्दुल रहमान, सकील अंसारी, अस्लम चौधरी सहित सहवनवाज ने जमानत पर रिहा करने को लेकर कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था, जिसपर आज सुनवाई हुई। सुनवाई पर आरोपियों की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि घटना में शामिल दर्जनों आरोपियों की जमानत हो चुकी है। उसी के आधार पर उनको भी जमानत पर रिहा किया जाए। जब घटना हुई थी उस वक्त अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उनका नाम जांच के बाद आया। उन्हें सन्देह के आधार पर मामले में शामिल किया गया। वहीं बनभूलपुरा कांड के साजिशकर्ता मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने आज भी उन्हें कोई राहत नही देते हुए अगली सुनवाई हेतु 25 मार्च 2026 की तिथि नियत की है। बता दें कि अब्दुल मलिक सहित अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने कूटरचित, झूठे शपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया। यही नही उनके द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया। जब जिला प्रसाशन इस अवैध अतिक्रमण को हटाने पहुंची तो उनपर पथराव किया गया। बाद में इसने दंगा का रूप ले लिया। इसी दंगे में सरकारी, पुलिस व अन्य लोग घायल हो गए कईयों की जान तक चली गयी। आरोपियों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नही है। पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। दंगे में शामिल कई लोगों को पूर्व में कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।