हरीश रावत का एक और 'धमाका': "हां, मैं तांत्रिक हूं, मैं घमंडी हूं!" कांग्रेस के भीतर 'तंत्र-मंत्र' विवाद पर पूर्व सीएम ने तोड़ी चुप्पी

Another 'Bombshell' from Harish Rawat: "Yes, I am a Tantric; I am Arrogant!" Former CM Breaks Silence on 'Tantra-Mantra' Controversy Within Congress.

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी कलह एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। कुछ दिन पहले हल्द्वानी में पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की मौजूदगी में पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी के ‘नेता और तांत्रिक’ वाले बयान ने सियासी हलचल मचा दी थी। बिना नाम लिए दिए गए इस इशारे को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर संकेत माना जा रहा था। अब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सबसे सीनियर चेहरे हरीश रावत ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सनसनीखेज जवाब दिया है।सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखते हुए हरीश रावत ने लिखा – “वाह, am I – #Tantrik...!!” इसके बाद उन्होंने साफ कहा, “मैं तांत्रिक हूं।” रावत ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए इंदिरा गांधी से जुड़ी पुरानी घटना याद की। उन्होंने बताया कि 1968 में जब देश के अधिकांश दिग्गज इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़े हो गए थे, तब लखनऊ विश्वविद्यालय में राज नारायण और मुख्यमंत्री टी.एम. सिंह के प्रबल विरोध के बावजूद उन्होंने इंदिरा गांधी की सभा करवाई। युवक कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने इंदिरा भक्ति दिखाई।

1977 में जब कांग्रेस लगभग खाली हो गई थी, तब भी वे झंडा थामे खड़े रहे। 1990 के बाद पहाड़ों में कांग्रेस संकट में आई, राज्य आंदोलन के दौरान कांग्रेस को खलनायक बताया गया। 1996 में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे थे, फिर भी हरीश रावत साथियों के साथ कांग्रेस का झंडा थामे रहे। आज भी केंद्र सरकार के दंश झेलते हुए वे कांग्रेस और उत्तराखंडियत का झंडा अटल खड़े हैं। रावत ने लिखा, “मैं हारा, मगर हार के बाद न कांग्रेस छोड़ी, न क्षेत्र छोड़ा। यदि अल्मोड़ा सीट आरक्षित नहीं होती तो वहीं से लड़ता। हरिद्वार ने मुझे अपनाया, तो मैं पूरी शक्ति से हरिद्वार के साथ हूं। हर चुनाव में सीट नहीं बदली। कार्यकर्ताओं के साथ हार में भी खड़ा रहा। यही कारण है कि जिन सीटों पर मैं हारा, अगले चुनाव में कांग्रेस जीती। शायद इसलिए मैं तांत्रिक हूं, शायद इसलिए मैं घमंडी हूं और गलतफहमी का शिकार हूं। तंत्र का सहारा लिए अब भी खड़ा हूं, मगर यह तंत्र कार्यकर्ताओं और उत्तराखंडियत पर विश्वास रखने वाले भाई-बहनों का है।” बताया जाता है कि हरीश रावत के मुख्यमंत्री काल में उनके करीबी रहे रामनगर के नेता रणजीत रावत भी उन पर ‘तंत्र-मंत्र’ का आरोप लगा चुके हैं। प्रकाश जोशी का हालिया बयान इसी सिलसिले को आगे बढ़ाता दिख रहा है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ पार्टी में अंदरूनी राजनीति तेज हो गई है। हरीश रावत का यह जवाब न सिर्फ आरोपों को खारिज करता है, बल्कि अपने लंबे संघर्ष और समर्पण को भी रेखांकित करता है। उन्होंने साफ किया कि उनका ‘तंत्र’ किसी जादू-टोने का नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के प्रति अटूट विश्वास और उत्तराखंड के प्रति समर्पण का है। इस बयान से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ इसे मजबूत जवाब मान रहे हैं, तो कुछ इसे पार्टी की एकता के लिए चुनौती बता रहे हैं। आने वाले दिनों में उत्तराखंड कांग्रेस में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। हरीश रावत का यह पोस्ट न केवल व्यक्तिगत बचाव है, बल्कि कांग्रेस के पुराने सिपाहियों के संघर्ष की कहानी भी है। क्या यह विवाद पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा या रावत की छवि को और मजबूत करेगा, यह तो समय बताएगा। फिलहाल उत्तराखंड की सियासी गलियारों में ‘तांत्रिक’ शब्द काफी गूंज रहा है।