आम जनता पर चौतरफा मार: 10% के पार जा सकती है थोक महंगाई, पेट्रोल-डीजल और होने वाले हैं महंगे

All-Round Blow to the Common Man: Wholesale Inflation Could Cross the 10% Mark; Petrol and Diesel Set to Become Even More Expensive.

नई दिल्ली। आम आदमी की जेब पर एक बार फिर बड़ा बोझ बढ़ने वाला है। सिस्टेमैटिक्स की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई तीन रुपये की बढ़ोतरी तो महज एक शुरुआत है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में थोक महंगाई दर का 10 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर जाना अब कोई मामूली खतरा नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत बनने की राह पर है।

ताजा आंकड़े देश की आर्थिक सेहत के लिए बेहद चिंताजनक हैं। थोक महंगाई दर इस समय 42 महीने के उच्चतम स्तर यानी 8.3 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। इसमें सबसे बड़ा झटका ईंधन और बिजली (फ्यूल एंड पावर) क्षेत्र से लगा है, जहां महंगाई की रफ्तार 24.71 प्रतिशत के डराने वाले स्तर तक जा पहुंची है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे घरेलू स्तर पर राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। रिपोर्ट का चौंकाने वाला दावा: तेल कंपनियों को पिछले महज तीन महीनों में करीब 1.7 से 1.8 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान हुआ है। हाल ही में जो तीन रुपये की बढ़ोतरी की गई है, उससे कंपनियों के इस विशाल घाटे की केवल सात से आठ प्रतिशत ही भरपाई हो पाएगी। साफ है कि इस भारी घाटे को पूरा करने के लिए आने वाले समय में आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई और दौर की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। थोक बाजार की यह आग अब बहुत जल्द खुदरा महंगाई को भी अपनी चपेट में लेने वाली है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.5 से 6 प्रतिशत कर दिया है, जो रिजर्व बैंक (RBI) के 4.6 प्रतिशत के अनुमान से कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट का मानना है कि साल की दूसरी छमाही तक यह खुदरा महंगाई छह से सात प्रतिशत के बीच पहुंच सकती है। इस चौतरफा महंगाई के कारण लोगों की खरीदारी करने की क्षमता (परचेजिंग पावर) घटेगी, जिससे देश की जीडीपी ग्रोथ रिजर्व बैंक के 6.9 प्रतिशत के अनुमान से काफी नीचे गिर सकती है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 100 के स्तर को पार कर सकता है। विदेशी मुद्रा के लेन-देन में घाटा बढ़ने से रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे आम आदमी के लिए लोन और महंगे हो जाएंगे।ग्रामीण इलाकों में महंगाई शहरों के मुकाबले ज्यादा तेजी से पैर पसार रही है, जिससे खेती और उद्योगों दोनों की लागत बढ़ने से मुनाफा घटने का अनुमान है।