NEET के बाद अब UPSC भी! कभी पेपर लीक, कभी भर्ती रद्द, कभी जांच... युवाओं का भविष्य है या सरकारी प्रयोगशाला? और सवाल उठते ही बचाव में क्यों उतर आता है पूरा तंत्र?

After NEET, now UPSC too! Sometimes paper leaks, sometimes recruitment cancellations, sometimes investigations... Is the future of the youth at stake, or is it a government laboratory? And why does t

आखिर देश की परीक्षाओं को हो क्या गया है?

देश में कभी प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के सपनों की सीढ़ी मानी जाती थीं। आज हालात ऐसे हैं कि परीक्षा का परिणाम आने से पहले ही उसकी निष्पक्षता पर बहस शुरू हो जाती है। NEET से लेकर राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं तक और अब UPSC जैसी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा तक, हर कुछ महीनों में कोई न कोई विवाद सामने आ जाता है। सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जिस पर करोड़ों युवा अपना भविष्य टिका कर बैठे हैं।

 

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब NSUI ने दावा किया कि परीक्षा के 100 में से 82 प्रश्न एक कोचिंग संस्थान ‘अनंतम IAS’ की अध्ययन सामग्री से मेल खाते हैं। छात्र संगठन ने इसे संयोग मानने से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद सोशल मीडिया पर पेपर लीक और मिलीभगत जैसे आरोप तेजी से वायरल होने लगे।

 

हालांकि केंद्र सरकार ने इन दावों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि यूपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय, सुरक्षित और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत संचालित होती है। विवादों के केंद्र में आए कोचिंग संस्थान ने भी सफाई देते हुए कहा कि उसने परीक्षा के बाद प्रश्नों का विश्लेषण कर सामग्री प्रकाशित की थी और तकनीकी कारणों से कुछ प्रकाशन तिथियों में बदलाव दिखाई दे सकता है। संस्थान ने किसी भी प्रकार की पूर्व जानकारी या पेपर लीक के आरोपों को खारिज किया है।

लेकिन यहीं से एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है।

PIB आखिर है क्या? PIB यानी प्रेस सूचना ब्यूरो भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली आधिकारिक एजेंसी है। दूसरी ओर UPSC भी भारत सरकार के संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत संचालित देश की सर्वोच्च भर्ती संस्था है। ऐसे में जब किसी परीक्षा पर सवाल उठते हैं और उसका प्राथमिक बचाव भी सरकार की ही एक एजेंसी करती है, तो स्वाभाविक रूप से कुछ लोगों के मन में यह सवाल पैदा होता है कि क्या स्वतंत्र जांच की आवश्यकता नहीं है? यह सवाल उठाना सरकार को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि पारदर्शिता की मांग करना है।

क्योंकि असली मुद्दा यह नहीं है कि आरोप किसने लगाए और सफाई किसने दी। असली मुद्दा यह है कि देश का युवा अब आश्वासन से ज्यादा प्रमाण चाहता है।

यह भी सच है कि किसी कोचिंग संस्थान के नोट्स से बड़ी संख्या में प्रश्नों का मिल जाना अपने आप में पेपर लीक का प्रमाण नहीं होता। वर्षों से अनुभवी शिक्षक संभावित विषयों और प्रश्नों का अनुमान लगाते रहे हैं। कई बार बड़ी संख्या में प्रश्न अनुमानित सामग्री से मिल भी जाते हैं। लेकिन जब संख्या 82 तक पहुंचने का दावा किया जाता है तो स्वाभाविक रूप से चर्चा और संदेह पैदा होते हैं। ऐसे में जांच की मांग को केवल राजनीति कहकर खारिज करना भी उचित नहीं माना जा सकता।

दरअसल समस्या सिर्फ UPSC की नहीं है। समस्या यह है कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक शब्द भारतीय युवाओं के शब्दकोश का सबसे कड़वा हिस्सा बन चुका है। कहीं भर्ती परीक्षाएं रद्द हो रही हैं, कहीं जांच एजेंसियां सक्रिय हैं, कहीं लाखों उम्मीदवार दोबारा परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। परिणाम यह हुआ है कि अब किसी भी परीक्षा पर आरोप लगते ही लोग उसे गंभीरता से लेने लगते हैं।

यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी विभिन्न परीक्षा विवादों की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी कि यदि परीक्षा की पवित्रता और निष्पक्षता प्रभावित होती है तो यह लाखों छात्रों के भविष्य पर सीधा प्रहार है और ऐसे मामलों में संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

आज जरूरत किसी राजनीतिक बयान की नहीं, बल्कि उस पारदर्शिता की है जो हर संदेह को खत्म कर सके। यदि आरोप निराधार हैं तो स्वतंत्र जांच उन्हें हमेशा के लिए खारिज कर देगी। और यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो वह भी सामने आ जाएगी।

क्योंकि आखिर कब तक देश का युवा हर परीक्षा के बाद यही पूछता रहेगा- "क्या मेरी मेहनत पर्याप्त है, या मुझे सिस्टम पर भी भरोसा करने का कोई कारण दिया जाएगा?"

यही सवाल आज UPSC से बड़ा है। यही सवाल पूरे परीक्षा तंत्र के सामने खड़ा है। और जब तक इसका संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक हर नई परीक्षा के साथ एक नया संदेह जन्म लेता रहेगा।