देवभूमि में नया चमत्कारः अल्मोड़ा के गंगतानी में दिखी प्राचीन शिवलिंग जैसी आकृति! रहस्यमयी गुफा भी मिली, पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के बाद उठेगा रहस्य से पर्दा
अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और अनगिनत देवस्थलों के लिए विश्वविख्यात है। यहां के मंदिरों में हर साल आस्था का सैलाब उमड़ता है। समय-समय पर ऐसे चमत्कार सामने आते हैं, जो लोगों की आस्था को और भी मजबूत करते हैं। ऐसा ही एक भावुक और रहस्यमयी मामला हाल ही में अल्मोड़ा जिले के गंगतानी क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक प्राचीन शिवलिंग और एक गहरी गुफा की खोज ने स्थानीय लोगों के मन में नई श्रद्धा जगा दी है।
अल्मोड़ा निवासी युवा भानू बिष्ट के मुताबिक पिछले दिनों वह जमीन संबंधी काम के सिलसिले में जंगल की ओर गए थे। तभी उनकी नजर एक प्राकृतिक रूप से बने शिवलिंग पर पड़ी। महज 200 मीटर की दूरी पर एक गहरी गुफा भी स्थित थी, जिसका अंत अभी तक पता नहीं चल सका है। स्थानीय लोगों ने इस गुफा को गोरखा की गुफा करार दिया है। गुफा के पास की दीवार पर सफेदी लगी हुई है, जो दूर से देखने पर किसी प्राचीन किले की दीवार जैसी लगती है। कई ग्रामीण इसे कत्युरी काल से जोड़कर देख रहे हैं, जब कुमाऊं क्षेत्र में मंदिरों और किलों का जाल फैला हुआ था। लोगों का मानना है कि यह स्थान किसी बड़े प्राचीन मंदिर का हिस्सा रहा होगा या फिर गोरखा काल में सुरक्षा और पूजा के लिए इस्तेमाल होता रहा होगा। शिवलिंग को लेकर लोगों में यह विश्वास है कि यह कम से कम एक हजार साल पुराना हो सकता है। देवभूमि में ऐसे कई स्थान हैं जहां प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। हांलाकि भानू बिष्ट का कहना है कि कुछ गांव वालों को इसकी जानकारी पहले भी थी, लेकिन इसको सामने नहीं लाया गया।
भानू बिष्ट ने इसकी जानकारी तुरंत पुरातत्व विभाग को दी है। बताया जा रहा है कि सोमवार को विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर सर्वेक्षण कर सकती है। हांलाकि प्रशासन और पुरातत्व विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था में कोई संदेह नहीं है। वे कहते हैं बाबा भोलेनाथ ने स्वयं प्रकट होकर हमें दर्शन दिए हैं। यह स्थान अब एक नया तीर्थ बन जाएगा। हांलाकि पुरातत्व विभाग की टीम की रिपोर्ट के बाद ही इस रहस्य से पर्दा उठेगा, लेकिन तब तक यह खोज श्रद्धालुओं के लिए आस्था का नया केंद्र बनी हुई है।