भारत-ऑस्ट्रिया दोस्ती का नया अध्याय: हैदराबाद हाउस में मोदी-स्टॉकर की 'महाबैठक', द्विपक्षीय समझौतों पर मुहर

A New Chapter in India-Austria Friendship: Modi and Strache Hold 'Mega-Meeting' at Hyderabad House; Bilateral Agreements Sealed

नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सदियों पुराने भरोसेमंद रिश्तों को आज एक नई ऊंचाई मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में ऑस्ट्रिया के चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। चांसलर स्टॉकर की यह चार दिवसीय यात्रा वर्ष 2025 में पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी पहली भारत और एशिया यात्रा है, जो वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।

हैदराबाद हाउस में हुई इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल रहे। दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य केंद्र आर्थिक सहयोग, लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान और क्षेत्रीय सुरक्षा रहा। प्रधानमंत्री मोदी की 2024 की सफल ऑस्ट्रिया यात्रा के दौरान बनी सहमतियों को आगे बढ़ाते हुए, इस बैठक में ग्रीन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में साझा काम करने की योजना पर चर्चा हुई। द्विपक्षीय वार्ता से पहले चांसलर स्टॉकर ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। चांसलर के बुधवार को भारत पहुंचने पर हवाई अड्डे पर राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने उनका भव्य स्वागत किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा 'भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी' को नई गति देने वाली साबित होगी। चांसलर स्टॉकर के साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें प्रमुख कारोबारी और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल हैं। भारत और ऑस्ट्रिया अब डिजिटल इनोवेशन और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों में निवेश बढ़ाने की दिशा में अग्रसर हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस मुलाकात को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इससे सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। इस यात्रा की पृष्ठभूमि दिसंबर 2023 में वियना में हुई विदेश कार्यालय स्तर की चर्चा के दौरान ही तैयार हो गई थी। सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और ऑस्ट्रियाई सचिव निकोलस मार्शिक के बीच हुई उस बैठक ने ही आज की इस उच्च स्तरीय यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रिया के साथ बढ़ता यह सहयोग न केवल व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को और प्रगाढ़ करने में भी सहायक होगा। बैठक के अंत में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई गई है, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाएंगे।