जब एंकर ही खबर की पहचान होते थे!दूरदर्शन की दिग्गज न्यूज रीडर सरला माहेश्वरी का निधन,टीवी पत्रकारिता के स्वर्णिम दौर का हुआ अंत
दूरदर्शन की लोकप्रिय और वरिष्ठ न्यूज रीडर सरला माहेश्वरी का निधन हो गया है। उनके निधन को भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्णिम दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है। सरला माहेश्वरी उन चुनिंदा समाचार वाचकों में शामिल थीं, जिन्होंने समाचार प्रस्तुति को गरिमा, विश्वसनीयता और संतुलन की नई पहचान दी।

ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर सरला माहेश्वरी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा कि उनकी विश्वसनीयता, शालीनता और सादगी आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। संगठन ने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की कामना भी की।

उनके निधन की खबर सामने आते ही पत्रकारिता जगत, उनके प्रशंसकों और दूरदर्शन युग को करीब से देखने वाले लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
सरला माहेश्वरी को उनके शांत, संतुलित और प्रभावशाली समाचार वाचन के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनकी आवाज में एक ऐसा आत्मविश्वास और गंभीरता थी, जो दर्शकों के मन में खबरों के प्रति भरोसा पैदा करती थी। उस दौर में समाचार प्रस्तुति केवल सूचना देने का माध्यम नहीं थी, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक पत्रकारिता का प्रतीक हुआ करती थी।
यह वह समय था जब दूरदर्शन देश का सबसे विश्वसनीय और प्रभावशाली समाचार माध्यम माना जाता था। डिजिटल और निजी चैनलों के दौर से पहले दूरदर्शन ही आम लोगों तक देश-दुनिया की खबरें पहुंचाने का प्रमुख स्रोत था। घर-घर में निर्धारित समय पर परिवार एक साथ बैठकर समाचार देखा करता था। उस समय समाचार पढ़ने वाले एंकर केवल प्रस्तोता नहीं, बल्कि भरोसे और सत्यता का चेहरा माने जाते थे।
दूरदर्शन के समाचार वाचकों की भाषा शुद्ध, उच्चारण स्पष्ट और प्रस्तुति बेहद संतुलित होती थी। खबरों में सनसनी या नाटकीयता की जगह तथ्य, गंभीरता और सटीकता को प्राथमिकता दी जाती थी। सरला माहेश्वरी जैसे एंकरों ने समाचार वाचन को एक सम्मानजनक और संस्कारित पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने पेशेवर व्यवहार और नैतिक मूल्यों से पत्रकारिता के उच्च मानक स्थापित किए।
सरला माहेश्वरी के निधन को भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। एक यूजर ने लिखा कि वे उस दौर की पहचान थीं, जब समाचार का मतलब स्पष्ट और सटीक जानकारी देना होता था, न कि मनोरंजन या सनसनी फैलाना। वहीं एक अन्य यूजर ने उन्हें शानदार व्यक्तित्व और प्रेरणादायक आवाज बताते हुए कहा कि वे उन्हें सुनते हुए बड़े हुए हैं।
सरला माहेश्वरी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनकी प्रस्तुति शैली और पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मार्गदर्शक बनी रहेगी। भारतीय टेलीविजन इतिहास में उनका योगदान हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।