Oct 15, 2026 Login
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उत्तराखंड स्पेशल : क्या अब तक उत्तराखंड के इन पारंपरिक व्यंजनों को नही चखा आपने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ने लगी है उत्तराखंड के व्यंजनों की मांग

Uttarakhand Special: Have you not tasted these traditional dishes of Uttarakhand till now, you have started increasing the demand of Uttarakhand cuisine in the international market too

देवभूमि उत्तराखंड जहां बेमिसाल प्राकृतिक सौंदर्य अपनी छटाओ से मन मोह लेता है जहां की शांत वादियां शहरों के शोरगुल से परेशान मन को आनंद देती हैं जहां के व्यंजन सेहत से भरपूर होते हैं।देवभूमि उत्तराखंड की जब जब बात होती है तब तब यहाँ के पौष्टिक भोजन को याद करना तो बनता है । उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन न सिर्फ गुणवत्ता के लिहाज से लाभकारी होते है बल्कि स्वाद की दृष्टि से भी बेहद ही लजीज भी होते है।अब तो उत्तराखंड के व्यंजनों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी होने लगी है।पहाड़ों के मंडवे,झंगोरा,भट्ट,गौहत,तिल इत्यादि अतंर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहे है।


तो आइए आज आपको भी उत्तराखंड के उन व्यंजनों के बारे में बताते है जो विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रहे है जिन्हें खा कर आप भी उंगलियां चाटते रह जाएंगे।


भांग की चटनी:उत्तराखंड के व्यंजनों के स्वाद को बढ़ाने के लिए यह उत्तम सहायक व्यंजन है,आप चाहे कुमाऊं में हो या गढ़वाल में और चाहे किसी भी तरह का भोजन कर रहे हैं तो भांग की चटनी इसे और स्वादिष्ट बनाती है, इसका खट्टा-नमकीन-तीखा फ्लेवर सभी तरह के परांठे और मंडवे की रोटी के साथ जबरदस्त स्वाद देता है।


ताजा सुगंध और खट्टी इमली का स्वाद बहुत लंबे समय तक अपनी जीभ पर रह सकता है।यह भांग के अनूठे सुगंध वाले बीज,जीरा, लहसुन के पत्ते; इमली और नमक को एक साथ सिलबट्टे में पीस कर बनायीं जाती है तथा उत्तराखंड में बनाई गई किसी भी पकवान को सम्पूर्ण कर सकती है|


सिंगोड़ी:कुमाऊँ में आकर सिंगोडी नहीं चखना एक बहुत बड़ा पाप है! डरा नही रहे है बल्कि बता रहे है क्योंकि अगर आपने सिंगोड़ी नही चखी तो बाद में आप पछताओगे ज़रूर।यह मिठाई खोया जिसे आप आम भाषा मे मेवा भी कहते है से बनाई जाती है जिसे मालू के पत्ते में लपेटा जाता है जो इसे अनूठा बनता है |मालू पत्ती की ताजी गंध और इलायची और नारियल के साथ स्वाद युक्त गाढे दूध का स्वाद आपको अधिक मांगने के लिए विवश कर देगा।सम्पूर्ण उत्तराखंड में सिंगोड़ी बनाने में अल्मोड़ा सबसे प्रसिद्ध है|


झिंगोरे की खीर:झिंगोरा एक प्रकार का मोटा अनाज है और इस मीठे व्यंजन का मुख्य घटक है|उत्तराखंड के इस मीठे पकवान में दूध, काजू और किशमिश मिलाई जाती है यह खास मिठाई अपनी समृद्ध बनावट और एक स्वाद के लिए जानी जाती है जिसे कोई भी आसानी से नहीं भूल सकता।पोषक तत्वों और स्वाद में उच्च यह मिष्ठान उत्तराखण्डी व्यंजनों के भारी दौर के बाद अवश्य खानी चाहिए।

अल्मोड़ा की बाल मिठाई:ये बाल मिठाई ये भूरे रंग के चॉकलेट की तरह दिखती हैं,जिसे खोया को भून कर उसे सफेद चीनी गेंदों के साथ लेपित कर बनाया जाता है| यह भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखंड मुख्यतः अल्मोड़ा एवं उसके आस-पास के क्षेत्र की एक प्रसिद्ध मिठाई है |बाल मिठाई लंबे समय से अल्मोड़ा जिले की और पड़ोसी कुमाऊं हिल्स की विशेषता है।


अरसा:शादी-ब्याह के मौसम में इसे खास तौर पर बनाया जाता है,इसके लिए चावल को पीसकर आटे की शक्ल दी जाती है, फिर गुड़ को पिघलाकर इसमें मिलाया जाता है और बिस्किटफिर के आकार में तेल या घी में फ्राई किया जाता है,गढ़वाल का यह एक पारंपरिक मीठा पकवान है।


चैसोणी    :इसमें उड़द और भट्ट की दाल को पीसकर गाढ़ा पकाया जाता है, इसके स्वाद में इजाफे के लिए बारीक टमाटर, प्याज, अदरक का पेस्ट बनाकर खूब पकाया जाता है,यह दिन के खाने के तौर पर खूब पसंद किया जाता है।
बाड़ी:इसे बनाने के लिए मंडवे के आटे में नमक, लाल मिर्च पाउडर मिलकार हलवे की तरह गाढ़ा पकाया जाता है,गढ़वाल में अधिकतार पकवान और व्यंजन बनाने के लिए लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल होता है।


कंडाली का साग    :कंडाली हरी सब्जी की तरह होती है, ये पहाड़ो में आसानी से मिल जाती है जिसमें सुई जैसे छोटे-छोटे कांटे होते है,इसके लिए पत्ते को अच्छी तरह धोकर बस तब तक उबाला जाता है, जब तक कि पूरी तरह पक न जाए, सर्दी के मौसम में यह गढ़वाल में ये व्यंजन खूब बनाया जाता है।


फाणु का साग    :इसमें गौहत की दाल को पीसकर गाढ़ा पकाया जाता है, इसके पानी का खास ख्याल रखा जाता है,यह जितनी गाढ़ी बने उतना बेहतर,जब पीसी हुई गहत अच्छे से गाढ़ी हो जाए तब उसमें बारीक टमाटर, प्याज, अदरक, लहसन आदि डालकर इसे अच्छी तरह पकाया जाता है।

गौहत के परांठे    :सुबह के नाश्ते के लिए गौहत की दाल के परांठे गढ़वाल में ऑल टाइम फेवरेट हैं। तासीर से गर्म गौहत पहाड़ी मौसम के लिहाज से भी लाभदायक है।भांग की चटनी के साथ इसका स्वाद और निखर जाता है,लोग गौहत की दाल को भूनकर भी खाना पसंद करते हैं।आमतौर पर इसके लिए मंडवे के आटे का इस्तेमाल होता है।