नैनीतालः दिल्ली में युवाओं, छात्राओं और अधिवक्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर उबाल! अधिवक्ताओं और सिविल सोसाइटी ने एकजुट होकर उठाई आवाज
नैनीताल। दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार और वोट की रक्षा के मुद्दे को लेकर अब नैनीताल में भी आवाज उठने लगी है। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, युवाओं और छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार तथा अधिवक्ताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में नैनीताल की सिविल सोसाइटी, अधिवक्ताओं और विपक्षी संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। बीएल साह ओपन थिएटर में प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ी पाबंदियां और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार है। वोट का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान युवाओं, छात्राओं और अधिवक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया तथा बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया।लोकतंत्र में सवाल पूछना कोई अपराध नहीं है। यदि युवा और छात्र अपने अधिकारों के लिए सवाल उठाते हैं और जवाब मांगते हैं, तो उन्हें हिरासत में लेने की कार्रवाई पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। यह किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। नैनीताल में मौजूद अधिवक्ताओं और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वर्गों को एकजुट होना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तथा मौजूदा कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।