Oct 14, 2026 Login
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उत्तराखंड हाईकोर्ट:फेसबुक में फेक आईडी बनाकर लोगो को ठगने के मामले में हाईकोर्ट ने फेसबुक, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, डीजीपी,एसएसपी हरिद्वार को जारी किया नोटिस

Uttarakhand High Court: High Court issues notice to Facebook, Central Government, State Government, DGP, SSP Haridwar in case of cheating people by making fake ID in FacebookUttarakhand High Court: H

उत्तराखंड हाइकोर्ट ने फेसबुक में लोगो की फर्जी आईडी बनाकर उनकी  फोटोजों को एडिटिंग करके उनका अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डालने की धमकी देने / उनसे लाखों रुपये वसूलने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। खण्डपीठ ने मामले को सुनने के बाद डायरेक्टर फेसबुक इंडिया , केंद्र सरकार राज्य सरकार ,डीजीपी व एएसपी हरिद्वार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। 


आपको बता दे हरिद्वार निवासी आलोक कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि वे इस मामले में स्वयं भी पीड़ित हुए है। याचिकाकर्ता का कहना है फेसबुक में लोगो की फर्जी आईडी बनाकर  फ्रेंड्स रिक्वेस्ट भेजी जा रही है। इसके कुछ समय बाद फ्रेंड्स रिक्वेस्ट मंजूर कर लेने के बाद उनकी फोटोज को एडिटिंग करके उनकी अश्किल वीडियो बनाई जा रही है। ये वीडियो बनाकर उन्हें भेज दी जा रही है उनसे कहा जा रहा है कि आप इतने पैसे दो नही देने पर आपका यह वीडियो उसके घरवाले या दोस्तों को भेज दिया जाएगा ।याचिकाकर्ता के पास भी इसी तरह का वीडियो भेजा गया था। जब इसकी शिकायत उन्होंने एसएसपी हरिद्वार, डीजीपी, सेकेट्री होम से की तो इस पर कोई कार्यवाही नही हुई। उनके द्वारा आरटीआई में पुलिस विभाग से पूछा कि अभी तक उत्तराखंड में इस तरह के कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई। उनको बताया गया कि अभी 45 पीड़ितों ने इस सम्बन्ध में शिकायत की है। अभी मामला विचाराधीन है।याचिकाकर्ता का कहना है कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है इस तरह की वीडियो बनाकर उनके दोस्तों व परिजनों को भेजना गलत है। पीड़ित लोग बिना वजह के आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे है।फेसबुक को कमाई का धंधा बना दिया है। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में प्रार्थना की है कि फेसबुक को यह निर्देश दिए जायँ की इस तरह की अश्लील वीडियो डालने वाले लोगो की आईडी को ब्लाक किया जाय।सोशल मीडिया से अश्लीलता से भरे वीडियोज को हटाया जाय। फेसबुक , एसएसपी , डीपीजी को निर्देश दिए जाएं कि एक ऐसा नम्बर जारी करें जिसमे पीड़ित लोग अपनी शिकायत कर सकें।