उत्तराखण्डः जागेश्वर में देवदार के पेड़ों का कटान का मामला! विरोध में लोगों का चिपको आंदोलन, दोबारा होगा सर्वे
अल्मोड़ा। जागेश्वर में मास्टर प्लान के तहत हो रहे सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 1000 देवदार के पेड़ों को काटने की तैयारी शुरू की गई और कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने चौड़ीकरण की जद में आ रहे पेड़ों का चिह्नीकरण करना शुरू कर दिया, जिसके बाद क्षेत्र के लोग इसके विरोध में उतर आए और कहा कि अस्था से जुड़े दारूक वन में खड़े इन पेड़ों की वे पूजा करते हैं। सोशल मीडिया में ये मुद्दा बेहद गर्माया है और चिपको आंदोलन की ही तरह जागेश्वर में भी पेड़ बचाओ आंदोलन शुरू करते हुए हिमगिरि ग्रीन संस्था और तमाम लोगों ने पेड़ों से चिपक कर पेड़ों के कटान का विरोध किया। वहीं जागेश्वर के पूर्व प्रधान ने भी सोशल मीडिया में सीएम धामी सहित तमाम नेताओं और जिम्मेदारों को टैग करते हुए पेड़ों को बचाने का आह्वाहन किया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक भी इस आंदोलन की आवाज पहुंची और उन्होंने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि पेड़ों को नही काटा जाएगा। देवदार पेड़ जागेश्वर धाम और शिव आस्था का मुद्दा है इसके लिए पुनः सर्वे करवाया जायेगा। आपको बता दें कि जागेश्वर धाम देवदार के जंगल के बीच स्थित है। इसे दारूक वन के नाम से भी पहचान मिली है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यही दारुक वन भगवान शिव का निवास स्थान है। धाम के विकास के लिए मास्टर प्लान को धरातल पर उतारा जा रहा है। मास्टर प्लान के तहत आरतोला से जागेश्वर तक तीन किमी सड़क का चौड़ीकरण होना है, टू-लेन सड़क बनाने के लिए इसकी जद में आ रहे 1000 से अधिक देवदार के पेड़ों का कटान होना था,जिसके बाद ,हिमगिरि ग्रीन फाउंडेशन, स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने सोमवार को बैठक कर कहा था कि यहां स्थित देवदार के पेड़ों को शिव-पार्वती, गणेश, पांडव वृक्ष के रूप में पूजा जाता है। मामले में सीएम धामी ने संज्ञान लिया और फिलहाल देवदार के पेड़ो के कटान पर रोक लगा दी है।