अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा बयान: मैं जब चाहूंगा खत्म कर दूंगा जंग, ईरान-इजरायल जंग पर ट्रंप का बड़ा दावा
पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष अब और गहराता जा रहा है। दोनों देशों के बीच चल रही जंग बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गई, जबकि लगातार हो रहे हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि जब भी वे चाहेंगे यह युद्ध खत्म हो सकता है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि हाल के सैन्य हमलों के बाद ईरान में अमेरिका के लिए निशाना बनाने लायक बहुत कम ठिकाने बचे हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर वे चाहें तो युद्ध को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया जा सकता है। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस बीच संघर्ष के मोर्चे पर भी हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों पर हमला करने का दावा किया है। आईआरजीसी के अनुसार लाइबेरिया के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज और एक थाई बल्क कैरियर ने ईरानी नौसेना की चेतावनी को नजरअंदाज किया, जिसके बाद उन पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया।
आईआरजीसी ने बताया कि “एक्सप्रेस रोम” नामक जहाज, जिस पर लाइबेरिया का झंडा लगा था और एक अन्य जहाज “मयूरी नारी” को चेतावनी के बावजूद नहीं रुकने पर निशाना बनाया गया। हमले के बाद दोनों जहाजों को रोक दिया गया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसी बीच मोजतबा खामेनेई को लेकर भी खबर सामने आई है। एक ईरानी अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को बताया कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को हल्की चोट लगी है। हालांकि चोट के बावजूद वे अपने पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। अधिकारी ने यह नहीं बताया कि उन्हें चोट कब और कैसे लगी, लेकिन यह जरूर कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली सामान्य रूप से जारी है। पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रहे हमलों और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में जाता है और क्या कोई कूटनीतिक समाधान सामने आ पाता है।