होर्मुज तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल,ट्रंप की 'युद्ध' की धमकी से दहला वैश्विक बाजार,ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में रविवार को तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को सख्त चेतावनी देने के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.4 प्रतिशत बढ़कर 110.60 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.8 प्रतिशत चढ़कर 113.60 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठाने को तैयार है। ईरान ने इस पर साफ जवाब दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि जब तक युद्ध से हुए नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होती, तब तक यह मार्ग बंद रहेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के लगभग एक पांचवें तेल व्यापार का मार्ग है। फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने टैंकरों पर हमलों के जरिए इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस तनाव के कारण तेल की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं और अब ट्रंप की नई धमकी ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।इस बीच ओमान ने मध्यस्थता की पहल की है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसके प्रतिनिधियों ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के विकल्पों पर चर्चा हुई। हालांकि अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। ओपेक+ और सहयोगी देशों ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान सहित आठ देशों ने मई 2026 से प्रतिदिन कुल 2.06 लाख बैरल (206,000 barrels per day) अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है।
इस योजना के तहत:
सऊदी अरब और रूस: 62-62 हजार बैरल प्रतिदिन
इराक: 26 हजार बैरल
यूएई: 18 हजार बैरल
कुवैत: 16 हजार बैरल
कजाखस्तान: 10 हजार बैरल
अल्जीरिया: 6 हजार बैरल
ओमान: 5 हजार बैरल
ओपेक+ ने स्पष्ट किया कि यह कदम बाजार स्थिरता के लिए उठाया गया है और उत्पादन में बदलाव परिस्थितियों के अनुसार धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज लंबे समय तक बंद रहने पर वैश्विक सप्लाई पर गंभीर असर पड़ेगा, जिससे कीमतों में और तेजी आ सकती है। ओपेक+ की यह वृद्धि दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने की कोशिश मानी जा रही है, लेकिन वास्तविक उत्पादन बढ़ाने में युद्ध के कारण चुनौतियां हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो तेल की कीमतें और ऊंचाई छू सकती हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, मुद्रास्फीति और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। भारत जैसे तेल आयातक देशों को महंगे कच्चे तेल का बोझ उठाना पड़ सकता है। फिलहाल बाजार ट्रंप की डेडलाइन और ईरान की प्रतिक्रिया पर नजरें टिकाए हुए है। अगर होर्मुज नहीं खुला तो स्थिति और बिगड़ सकती है।