US-ईरान तनाव का भारत पर असर: रुपया 92.18 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सेंसेक्स 1,600 पॉइंट से ज़्यादा गिरा

US-Iran Tensions Impact India: Rupee Slumps to Record Low of 92.18, Sensex Crashes Over 1,600 Points Amid Surge in Crude Oil Prices

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ उछाल का सीधा असर भारतीय मुद्रा और शेयर बाजार पर दिखाई दिया। बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 69 पैसे की गिरावट के साथ 92.18 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।

विदेशी मुद्रा बाजार में घरेलू मुद्रा 92.05 प्रति डॉलर पर खुली और थोड़ी ही देर में फिसलकर 92.18 के स्तर पर आ गई। यह पिछले कारोबारी सत्र के 91.49 के बंद स्तर से उल्लेखनीय गिरावट है। मंगलवार को होली के कारण विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहा था, जिसके बाद खुले पहले सत्र में ही दबाव साफ दिखा। फॉरेक्स विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से निवेशकों ने जोखिम वाले परिसंपत्तियों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इससे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी और उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये पर दबाव बना।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में वैश्विक तेल बेंचमार्क Brent Crude वायदा कारोबार में 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ यह 82.22 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी लगभग 85 प्रतिशत ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में हर तेज उछाल से आयात बिल बढ़ने और चालू खाते के घाटे पर दबाव की आशंका मजबूत हो जाती है, जो अंततः रुपये को कमजोर करती है।


छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला U.S. Dollar Index 0.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.08 पर कारोबार करता दिखा। डॉलर की मजबूती भी रुपये की कमजोरी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। तेल कीमतों में तेजी और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच घरेलू इक्विटी बाजार भी दबाव में रहे।


BSE Sensex 1,671.39 अंक यानी 2.08 प्रतिशत गिरकर 78,567.46 पर आ गया। वहीं Nifty 50 502.35 अंक या 2.02 प्रतिशत टूटकर 24,363.35 पर कारोबार करता दिखा। एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी, जिससे बाजार की धारणा पहले से ही कमजोर बनी हुई थी।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो रुपये और शेयर बाजार दोनों पर दबाव जारी रह सकता है। आयात लागत बढ़ने से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ने की संभावना है।