बिहार पर आफत की बारिश: अगले 5 दिन झमाझम बरसात और वज्रपात का अलर्ट, पहली ही बौछार में डूबे अस्पताल
पटना। बिहार में मानसून की रफ्तार तेज होते ही जहां एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ इस मानसूनी बारिश ने सरकारी दावों और प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने राज्य में अगले पांच दिनों के लिए भारी बारिश, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और आकाशीय बिजली (वज्रपात) का गंभीर अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को गोपालगंज और कैमूर में हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कैमूर जिले में वज्रपात की चपेट में आने से दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई।
पटना मौसम विभाग के अनुसार, पूरे प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। विभाग ने सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्णिया, भागलपुर और बांका जिलों में मूसलाधार बारिश को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, मुजफ्फरपुर, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी और कटिहार समेत कई जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। राज्य के शेष जिलों में 'येलो अलर्ट' प्रभावी रहेगा। आपदा प्रबंधन विभाग ने भी बिगड़ते मौसम को देखते हुए आम जनता को सुरक्षित स्थानों पर रहने की ताकीद की है। प्रशासनिक कुव्यवस्था और भ्रष्टाचार का सबसे हैरान करने वाला नजारा गोपालगंज जिले में देखने को मिला। यहाँ आई तेज आंधी और बारिश को करीब 38 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना नवनिर्मित हाईटेक 'मॉडल सदर अस्पताल' झेल नहीं सका। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार (पोर्टिको) के ऊपर लगी फॉल्स सीलिंग ताश के पत्तों की तरह बिखर कर जमीन पर आ गिरी। सीलिंग गिरते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि मलबे की जद में कोई मरीज या स्वास्थ्यकर्मी नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, अस्पताल के भीतर फायर पाइप फटने से पानी का भारी रिसाव शुरू हो गया, जिससे पूरा अस्पताल जलमग्न हो गया। कैमूर जिले के भभुआ में हुई महज एक घंटे की मूसलाधार बारिश ने सदर अस्पताल परिसर को तालाब में तब्दील कर दिया। अस्पताल परिसर में घुटने भर पानी भर जाने के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को उसी गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विनोद कुमार ने लाचारी जताते हुए कहा कि अस्पताल गेट के बाहर बना नाला अस्पताल परिसर की जमीन से ऊंचा है, जिससे जल निकासी रुक जाती है। फिलहाल मोटर लगाकर पानी बाहर निकाला जा रहा है। कैमूर जिले में आसमानी बिजली दो परिवारों के लिए काल बनकर गिरी। पहली घटना भभुआ वार्ड नंबर 25 की है, जहाँ अपने मकान की दूसरी मंजिल की छत पर खड़ी 50 वर्षीय शकुंतला देवी (पत्नी राजन शेख) पर तेज गर्जन के साथ बिजली गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। दूसरी घटना चैनपुर थाना क्षेत्र के बौरई गांव की है, जहाँ लालू बिंद की पत्नी मोतिया देवी शाम को खेत में भैंस चराने गई थीं। इसी दौरान मूसलाधार बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गईं और उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से आपदा राहत सहायता राशि की मांग की है। जिला प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी कर लोगों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान पेड़ों या खुले आसमान के नीचे खड़े न हों और पक्के मकानों में शरण लें।