सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसलाः कुत्ते के काटने से हुई मौत तो राज्य सरकार को देना होगा भारी मुआवजा! पूछा- क्या आपकी भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं, इंसानों के लिए नहीं?

The Supreme Court's important decision: The state government must pay substantial compensation for a death caused by a dog bite! The question asked, "Do you only have feelings for dogs, not for human

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को आवारा कुत्तों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के काटने से होने वाली मौतों और चोटों के मामलों में राज्य सरकारों को भारी मुआवजा देना होगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्ते प्रेमियों और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों पर भी इसकी जवाबदेही तय की जाएगी, अगर वो ऐसा नहीं कर सकते हैं तो कुत्तों को अपने घर या परिसर में ही रखें। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलीलें पेश कीं। दातार ने कहा कि 7 नवंबर का आदेश पूरी तरह वैधानिक और कानून समर्थित है। दातार ने कहा कि मामले में किसी विशेषज्ञ समिति के गठन की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एबीसी नियम 60 से ज्यादा केंद्रीय और राज्य कानूनों के खिलाफ हैं। दातार ने वन्यजीव क्षेत्रों में आवारा कुत्तों से खतरे का मुद्दा उठाया।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 9 साल के बच्चे की मौत पर जिम्मेदारी किसकी होगी? कोर्ट ने कहा कि डॉग बाइट से मौत और चोट के मामलों में राज्य को भारी मुआवजा देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट की हर घटना पर जिम्मेदारी तय करने के संकेत दिए। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने से हुई चोट या मौत पर अधिकारियों की जवाबदेही बनती है। सुप्रीम कोर्ट ने डॉग फीडर्स की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को खिलाने वाले ग्रुप से सवाल किया पूछा- क्या आपकी भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं, इंसानों के लिए नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या अदालत को आंखें मूंद लेनी चाहिए? कहा कि इन मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है, आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि क्या इस अदालत को आंखें बंद करके सब कुछ होने देना चाहिए? ऐसा लगता है कि सहानुभूति सिर्फ कुत्तों के लिए ही है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि कुत्ते के काटने से होने वाली हर चोट या मौत के लिए संबंधित अधिकारियों और कुत्ते पालने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों को इधर-उधर घूमने और उपद्रव मचाने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? जब हम केंद्र और राज्यों की बात सुनेंगे, तो हम उनसे गंभीर सवाल पूछेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले 15 जनवरी की तिथि तय हुई थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकीलों की मांग पर 20 जनवरी से सुनवाई करना तय किया गया। एक वकील ने आवारा कुत्तों को गोद लेने, एआई से उनकी ट्रैकिंग करने और अन्य कई उपायों के पक्ष में तर्क दिया। इसपर जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा कि क्या आप सच में ऐसा कह रहे हैं, काश कोई अनाथ बच्चों के लिए भी तर्क दे पाता, मुझे 2011 में जज नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा लेकिन मैंने इंसानों के लिए इतने भावुक तर्क कभी नहीं सुने। जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा कि अगर कोई आवारा कुत्ता किसी पर हमला कर दे तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? वकील ने जवाब दिया कि स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए जिम्मेदारी तय की जा सकती है। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि आवारा कुत्ता किसी के कब्जे में नहीं होना चाहिए। अगर आप पालतू जानवर रखना चाहते हैं, तो लाइसेंस लें।