पटना में बिखरी पुरुषोत्तम धाम की छटा: इस्कॉन से निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा,सीएम सम्राट चौधरी ने खींचा रथ,लगाई झाड़ू

The splendor of Purushottam Dham shines in Patna: Lord Jagannath's Rath Yatra sets out from ISKCON; Deputy CM Samrat Chaudhary pulls the chariot and performs the ritual sweeping.

पटना। बिहार की राजधानी पटना में भगवान श्री जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के अवसर पर आस्था, भक्ति और अद्भुत समरसता का अनुपम नजारा देखने को मिला। बुद्ध मार्ग स्थित भव्य इस्कॉन मंदिर से महाप्रभु जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा की विशाल रथयात्रा पूरे पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। इस पावन अवसर पर सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी विशेष रूप से शामिल हुए। दोनों ही राजनेताओं ने आम श्रद्धालुओं की तरह भगवान के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की, जिसने पूरे माहौल को और अधिक दिव्य बना दिया। रथयात्रा की शुरुआत पुरी की ऐतिहासिक 'छेरा पहरा' परंपरा की तर्ज पर हुई। भगवान के रथ प्रस्थान से पूर्व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने पूरी विनम्रता के साथ सड़क पर झाड़ू लगाई (बुहारी की रस्म)। इसके पश्चात, दोनों नेताओं ने भगवान के विशाल रथ की पवित्र रस्सी (मनोकामना रस्सी) खींचकर इस भव्य रथयात्रा का विधि-विधान से शुभारंभ किया।  भगवान के स्वागत के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। रथ जिस मार्ग से गुजरने वाला था, वहां श्रद्धालुओं ने खुद झाड़ू लगाकर सड़कों की सफाई की और रंगोली बनाकर फूलों से महाप्रभु का स्वागत किया।  सुबह से ही इस्कॉन मंदिर परिसर से लेकर मुख्य सड़कों तक लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, धूप और उमस की परवाह किए बिना लोग रथ की रस्सी छूने और भगवान की एक झलक पाने के लिए लालायित दिखे। राजधानी में उमड़ने वाली ऐतिहासिक भीड़ को ध्यान में रखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे। सुबह से ही इस्कॉन मंदिर की ओर जाने वाले सभी रास्तों को सामान्य यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। बेली रोड और बुद्ध मार्ग के आसपास के इलाकों में ट्रैफिक रूट को डायवर्ट किया गया ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। पूरी यात्रा के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल और इस्कॉन के स्वयंसेवक सुरक्षा चक्र बनाए रहे। इस्कॉन पटना द्वारा आयोजित यह रथयात्रा एक बार फिर भक्ति, समरसता और सामाजिक एकता का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी, जिसने हर पटनावासी को जगन्नाथमय कर दिया।