Aug 22, 2026 Login

भोजशाला पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धार भोजशाला को माना हिंदू मंदिर! ASI रिपोर्ट पर जताया भरोसा, सुप्रीम कोर्ट जा सकता है मुस्लिम पक्ष

The High Court's historic decision on the Bhojshala case: Dhar Bhojshala is considered a Hindu temple! The Muslim side expressed confidence in the ASI report and may approach the Supreme Court.

भोपाल/धार। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और लंबे समय से विवादों में रहे धार भोजशाला मामले में शुक्रवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे मूल रूप से हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र माना है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों, वैज्ञानिक अध्ययन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर यह स्थापित होता है कि भोजशाला का मूल स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर एवं संस्कृत अध्ययन केंद्र का था। अदालत ने केंद्र सरकार और ASI को परिसर के संरक्षण, प्रबंधन और व्यवस्था को लेकर आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और वैज्ञानिक निष्कर्षों पर अदालत भरोसा कर सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा संविधान की भावना का हिस्सा है और सरकारों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि भोजशाला परिसर में हिंदू समुदाय की पूजा-अर्चना की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य और दस्तावेज इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि यह स्थल राजा भोज के समय स्थापित संस्कृत अध्ययन केंद्र और देवी सरस्वती मंदिर के रूप में अस्तित्व में था। अदालत ने कहा कि यह परिसर 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक घोषित है और इसका मूल धार्मिक चरित्र भोजशाला एवं देवी वाग्देवी सरस्वती मंदिर के रूप में स्थापित होता है।
हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा जारी उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें हिंदू पक्ष के पूजा अधिकार सीमित किए गए थे और मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि वह आदेश हिंदू पक्ष के अधिकारों को सीमित करता था, इसलिए उसे रद्द किया जाता है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे परिसर का प्रशासन और प्रबंधन ASI के अधीन ही रहेगा। फैसले में मुस्लिम पक्ष के लिए भी रास्ता खुला रखा गया है। अदालत ने कहा कि मुस्लिम समुदाय यदि चाहे तो धार जिले में नमाज के लिए अलग जमीन आवंटित करने हेतु सरकार से संपर्क कर सकता है। अदालत ने कहा कि सरकार श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। हाईकोर्ट ने जुलाई 2024 में पेश ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा कि परिसर के भीतर मंदिरनुमा स्थापत्य, मूर्तिकला और संस्कृत शिक्षा केंद्र से जुड़े कई साक्ष्य मिले हैं। अदालत ने कहा कि इन निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फैसले के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने इसे “बहुत ही ऐतिहासिक फैसला” बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने हिंदू पक्ष की मूल मांग को स्वीकार करते हुए साफ कहा है कि पूरा परिसर हिंदू मंदिर है। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदू पक्ष ने लंदन के संग्रहालय में रखी देवी वाग्देवी की मूर्ति को भारत वापस लाने की मांग उठाई थी, जिस पर अदालत ने विचार करने को कहा है।

क्या है भोजशाला का इतिहास?
इतिहासकारों के अनुसार करीब एक हजार वर्ष पहले परमार वंश के राजा भोज ने वर्ष 1034 ईस्वी में धार में संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला कहा गया। इसे देवी सरस्वती का मंदिर भी माना जाता था। वर्ष 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में इस संरचना को क्षतिग्रस्त किया गया। बाद में 1401 में दिलावर खान गौरी और 1514 में महमूद शाह खिलजी ने परिसर के हिस्सों में मस्जिद निर्माण कराया। वर्ष 1875 की खुदाई में यहां से देवी सरस्वती की प्रतिमा भी मिली थी। हाईकोर्ट का यह फैसला भोजशाला विवाद में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। लंबे समय से हिंदू पक्ष इसे सरस्वती मंदिर और संस्कृत विश्वविद्यालय बताता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता आया है। अब अदालत के इस फैसले के बाद पूरे देश की नजर केंद्र सरकार और ASI की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

धार जिले में कड़ी सुरक्षा
बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बैंच में इस मामले पर साल 2022 में याचिका आई थी। पिछले महीने 6 अप्रैल से लगातार सुनवाई के बाद 12 मई को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं, कोर्ट ने आज शुक्रवार 15 मई को मामले में अपना फैसला सुना दिया है। बता दें कि इस फैसले से पहले धार जिले में धारा 163 लागू कर दी गई थी। इसके साथ ही 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगा दी गई है और किसी भी तरह के धरना प्रदर्शन और जुलूस पर भी रोक लगाई गई है। मध्य प्रदेश पुलिस सोशल मीडिया पर किसी भी तरह के भड़काऊ कमेंट डालने वालों की सख्त मॉनिटरिंग कर रही है। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल की बोतल में बिक्री पर भी कड़ी निगाह रखी जा रही है। ऐसा करने वालों के खिलाफ एक्शन की तैयारी चल रही है। 

सुप्रीम कोर्ट का करेंगे रुख : शहर काजी
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद धार के शहर काजी ने कहा कि हम हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं।सलमान खुर्शीद ने बहुत अच्छा डिबेट किया। अब हम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करेंगे और सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। हम अपना दावा अब भी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट से हमें उम्मीद है।