बागेश्वर में विकास की तस्वीरः पांच किलोमीटर सड़क के लिए तरस रहा सेलकुना! स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं पर संकट, वर्षों से उठ रही मांग अब भी अधूरी

The face of development in Bageshwar: Selkuna longing for a five-kilometer road! Healthcare and education facilities in crisis; long-standing demands remain unfulfilled.

बागेश्वर। जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जैसर से सेलकुना-बसानी तक करीब पांच किलोमीटर सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कुर्सी में बांधकर पीठ पर लादना पड़ता है। बीते मंगलवार, 7 अगस्त को गांव के बुजुर्ग मथुरादत्त कबड़वाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने कुर्सी का सहारा लिया। बुजुर्ग को कुर्सी में बांधा गया और ग्रामीण करीब पांच किलोमीटर तक उन्हें पीठ पर लादकर उबड़.खाबड़ रास्तों और नालों को पार करते हुए जैसर तक लेकर पहुंचे। इसके बाद ही उन्हें वाहन के माध्यम से अस्पताल ले जाना संभव हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। सड़क के अभाव में गांव के लोगों को लंबे समय से इसी तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और छोटे बच्चों के लिए यह रास्ता बेहद मुश्किल साबित होता है। आपात स्थिति में मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों के अनुसार जैसर से सेलकुना-बसानी तक सड़क नहीं होने का असर केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है। गांव के विद्यार्थियों को भी प्रतिदिन पैदल आवागमन करना पड़ता है। बारिश के मौसम में रास्तों की स्थिति और खराब हो जाती है। नालों में पानी बढ़ने के कारण आवाजाही जोखिम भरी हो जाती है। महिलाओं और बुजुर्गों को रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के लिए भी पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण होने से क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।