खान सर केस में 'तारीख-पर-तारीख' का खेल: जानें वकील का वो मास्टरस्ट्रोक, जिससे टल रही गिरफ्तारी,क्या रद्द होगी एफआईआर?
पटना। पटना के चर्चित शिक्षक फैजल खान (खान सर) के मामले में इन दिनों अदालती गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक यही चर्चा आम है। हर सुनवाई की सुबह यह कयास लगते हैं कि आज फैसला हो जाएगा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद नई तारीख सामने आ जाती है। मंगलवार को भी कोर्ट में यही नजारा देखने को मिला, जहां अदालत ने खान सर के गिरफ्तार बॉडीगार्ड्स के हथियारों के लाइसेंस से संबंधित कागजात पेश करने का आदेश देते हुए अब अगली सुनवाई के लिए 3 जुलाई की तारीख मुकर्रर कर दी है। हालांकि, कानून के जानकारों का कहना है कि इन तारीखों के पीछे प्रक्रियाओं से ज्यादा खान सर के वकील का वो कानूनी दांव है, जिसने पूरे मामले को एक दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
मामला करीब एक महीने पुराना होने को है, लेकिन खान सर को अब तक पुलिस छू भी नहीं सकी है। दरअसल, इसके पीछे खान सर के अधिवक्ता द्वारा पटना हाईकोर्ट में खेला गया एक बड़ा कानूनी दांव है। वकील ने पटना हाईकोर्ट में एक विशेष अपील दायर कर फैजल खान सर के खिलाफ दर्ज नामजद प्राथमिकी को ही पूरी तरह से रद्द करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है कि इस एफआईआर को रद्द करने या न करने को लेकर सरकार का क्या रुख है। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होनी है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक हाईकोर्ट में यह मामला लंबित है, तब तक सिविल कोर्ट के लिए कोई भी अंतिम फैसला लेना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि खान सर के वकील सिविल कोर्ट में छोटे-छोटे तकनीकी आधारों पर तारीख-पर-तारीख ले रहे हैं। इस पूरे विवाद की शुरुआत बीती 2 जून की रात को हुई थी, जब खान सर की कोचिंग के सामने दो पक्षों के बीच हिंसक मारपीट और हंगामा हुआ था। घटना के अगले ही दिन पुलिस ने दूसरे पक्ष के रौशन आनंद सर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि शुरुआती तौर पर मामला सिर्फ आपसी झड़प का लग रहा था, लेकिन जब तक रौशन आनंद को जमानत मिलती, तब तक नेपाल में उनके भाई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की दुखद खबर आ गई, जिसने मामले को और गरमा दिया। इसी बीच घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें खान सर के सुरक्षाकर्मी सरेआम फायरिंग करते नजर आए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गोलीबारी के आरोप में खान सर के दो गार्ड्स को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद मामला बेहद गंभीर श्रेणी में आ गया। हैरानी की बात यह है कि मुख्य आरोपी के रूप में नाम सामने आने के बावजूद पुलिस ने खान सर को समय रहते गिरफ्तार नहीं किया। इसके बाद अदालत ने जांच में पुलिस का सहयोग करने की शर्त पर उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम छूट दे दी। यह पूरी तरह से एक सोची-समझी कानूनी रणनीति है। 3 जुलाई को जब सिविल कोर्ट में गार्ड्स के हथियारों के लाइसेंस के कागजात जमा किए जाएंगे, तब वकील किसी अन्य प्रक्रिया का हवाला देकर फिर एक नई तारीख की मांग कर सकते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सिविल कोर्ट की कार्यवाही को तब तक खींचना है, जब तक कि 13 जुलाई को पटना हाईकोर्ट का रुख साफ नहीं हो जाता। शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि 20 जून को इस मामले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी, लेकिन कानूनी पेंच के कारण यह मामला लगातार लंबा खींचता जा रहा है। अब सभी की निगाहें पहले 3 जुलाई को सिविल कोर्ट में होने वाली कागजी कार्रवाई और उसके बाद 13 जुलाई को पटना हाईकोर्ट में सरकार के जवाब पर टिकी हैं। क्या खान सर के खिलाफ दर्ज नामजद एफआईआर सचमुच रद्द हो जाएगी या उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी, इसका फैसला अब उच्च न्यायालय के रुख पर ही निर्भर करता है।