Sep 08, 2026 Login

पाठ्यपुस्तक बनी प्लेलिस्ट! पांचवीं की किताब में छपा ऐश्वर्या राय का गाना, निंबूड़ा-निंबूड़ा! शिक्षा तंत्र पर फिर उठे सवाल

Textbook turns into a playlist! Aishwarya Rai's song 'Nimbooda-Nimbooda' appears in a Class 5 textbook; questions raised about the education system once again.

ओडिशा। ओडिशा में एक बार फिर स्कूली पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता और संपादकीय प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार विवाद कक्षा 5 की अंग्रेजी की पुस्तक को लेकर खड़ा हुआ है, जिसमें कथित तौर पर वर्ष 1999 में प्रदर्शित फिल्म हम दिल दे चुके सनम के लोकप्रिय गीत 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' के बोल छप जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि नई शैक्षणिक सत्र की पुस्तकों के स्कूलों तक पहुंचने के बाद अभिभावकों और शिक्षकों ने इस त्रुटि की ओर ध्यान दिलाया। सोशल मीडिया पर पुस्तक के पन्नों की तस्वीरें सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया। तस्वीरों में कक्षा 5 की अंग्रेजी पुस्तक में फिल्मी गीत के अंश प्रकाशित दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद शिक्षा विभाग की संपादकीय और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पाठ्यपुस्तक को प्रकाशित करने से पहले लेखन, संपादन, प्रूफरीडिंग और अंतिम अनुमोदन जैसी कई स्तरों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी चूक समीक्षा के विभिन्न चरणों से गुजरकर छात्रों तक कैसे पहुंच गई। अभिभावकों का मानना है कि प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए तैयार की जाने वाली पुस्तकों में सामग्री चयन और भाषा की शुद्धता को लेकर विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस प्रकार की त्रुटियां न केवल शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, बल्कि छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती हैं।

आपको बता दें कि ओडिशा में शिक्षा से जुड़े विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। बीते वर्षों में राज्य की कुछ पाठ्यपुस्तकों में तथ्यात्मक त्रुटियों, मानचित्र संबंधी गलतियों, वर्तनी की अशुद्धियों और पाठ्य सामग्री के चयन को लेकर विवाद खड़े हो चुके हैं। कई अवसरों पर शिक्षाविदों और अभिभावकों ने पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन में पारदर्शिता, विशेषज्ञ समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है। फिलहाल इस कथित त्रुटि को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, मामले ने एक बार फिर पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन, संपादन और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया को अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बहस तेज कर दी है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो भविष्य में ऐसी चूकों को रोकने के लिए पाठ्यपुस्तक निर्माण और अनुमोदन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा सकती है।