कोटा की धरती से राहुल गांधी की गूंज: देश का एजुकेशन सिस्टम शिक्षा नहीं, युवाओं के शोषण की मशीन

Rahul Gandhi’s resounding message from Kota: The country’s education system is a machine for the exploitation of youth, not for education.

कोटा। राजस्थान की कोचिंग कैपिटल कहे जाने वाले कोटा के दशहरा मैदान में बुधवार की रात एक अलग ही नजारा था। राजनीति के तमाम स्थापित चेहरों को पीछे धकेलकर मंच पर सिर्फ और सिर्फ देश का भविष्य यानी युवा और छात्र मौजूद थे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में देश के वर्तमान शिक्षा ढांचे पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने बिना किसी राजनीतिक नारेबाजी के सीधे छात्रों के दर्द पर उंगली रखते हुए कहा, "आज का एजुकेशन सिस्टम बच्चों को निखारता नहीं, बल्कि उन्हें तनाव देता है, दबाता है और उनके सपनों की हत्या करता है। यह देश के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। हमें इस शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ मिलकर एक बड़ी लड़ाई लड़नी होगी। करीब एक घंटे तक मंच पर रहे राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वे यहाँ राजनीति करने नहीं, बल्कि हिंदुस्तान के भविष्य के मन की बात सुनने और समझने आए हैं। एजुकेशन सिस्टम की खामियों और व्यावसायिकता पर कड़ा प्रहार करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे। उन्होंने कहा कि आज भारत का एजुकेशन सिस्टम सिर्फ पैसा खींचने की एक मशीन बनकर रह गया है।

"सरकारी स्कूलों की हालत बदहाल है, प्राइवेट स्कूल आम आदमी की पहुंच से बाहर और बेहद महंगे हो चुके हैं। इसके बाद भी बच्चों को भारी-भरकम फीस देकर ट्यूशन और कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। नीट जैसी परीक्षा में बैठने वाले 22 लाख बच्चों से फीस और कोचिंग के नाम पर सालाना 1.32 लाख करोड़ रुपए ऐंठ लिए जाते हैं। यह रकम इतनी बड़ी है कि केंद्र सरकार का पूरा शिक्षा बजट इसके सामने कम पड़ जाता है। देश में केवल पांच बड़ी परीक्षाओं के नाम पर लिया जाने वाला पैसा, हमारे पांच बड़े मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर है। राहुल ने मंच पर मौजूद छात्रों सौम्या मीना, सानिया गुप्ता, जीशान आलम और हिमांशु डांगी से सीधे संवाद कर तैयारियों के खर्च का गणित समझा। जब छात्रों ने बताया कि एक छात्र की तैयारी पर सालाना 4 से 5 लाख रुपए का खर्च आता है, तो राहुल गांधी ने कहा कि माता-पिता कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं और बदले में सिस्टम उन्हें केवल मानसिक तनाव दे रहा है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कोटा में खुदकुशी करने वाली छात्रा आकांक्षा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "आकांक्षा डॉक्टर बनना चाहती थी, उसके पिता पैरालाइज्ड हैं। उसने कड़ी मेहनत की, नीट का एग्जाम दिया, लेकिन सिस्टम ने पेपर लीक कर दिया। आकांक्षा इस भ्रष्ट और क्रूर सिस्टम से हार गई और आज वह हमारे बीच नहीं है। उसने अपने माता-पिता के नाम एक पत्र छोड़ा था, जो पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है। मैं चाहता हूं कि इस देश में फिर कभी किसी आकांक्षा को आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम न उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि परीक्षा में बैठने वाले 3000 बच्चों में से केवल एक आईएएस बनता है, 30 आईआईटी में जाते हैं और मात्र 180 डॉक्टर बन पाते हैं। इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा और पेपर लीक के दोहरे दंश ने युवाओं को डिप्रेशन के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

शिक्षा के बाद रोजगार की भयावह स्थिति पर चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश का रोजगार सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। देश के युवाओं के पास डिग्रियां तो हैं, लेकिन काम नहीं है। बाकी बचे युवा या तो बेरोजगार घूमने को मजबूर हैं या फिर 'गिग वर्कर्स' बनकर उबर बाइक चलाने, मनरेगा में पसीना बहाने या कुली का काम करने को विवश हैं। राहुल ने दावा किया कि आज देश में 100 में से 80 इंजीनियर बेरोजगार घूम रहे हैं क्योंकि हमारा सिस्टम उन्हें हुनर और अवसर देने में नाकाम रहा है। अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' का संस्मरण सुनाते हुए राहुल ने कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4000 किलोमीटर की पैदल यात्रा के दौरान उन्होंने लाखों युवाओं से बात की। उन्होंने पूछा कि आखिर हर युवा सिर्फ डॉक्टर या इंजीनियर ही क्यों बनना चाहता है? क्या देश में अन्य करियर ऑप्शंस खत्म हो गए हैं? उन्होंने एक दिलचस्प वाकया साझा करते हुए कहा, "मैंने कई लड़कियों से पूछा कि तुम में से कितनी पायलट बनना चाहती हैं? किसी का हाथ नहीं उठा। तब मैंने उन लड़कियों को एक पायलट के साथ हेलीकॉप्टर के सफर पर भेजा। जब वे आसमान से वापस जमीन पर लौटीं और मैंने दोबारा वही सवाल पूछा, तो सबने एक सुर में कहा कि उन्हें पायलट बनना है। असल में हमारा सिस्टम युवाओं को सपने देखना ही नहीं सिखाता, वह उनके पंख कतर देता है।"

संवाद के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर आए एक विद्यार्थी के पैरेंट्स से भी बात की। माता-पिता ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि बच्चे दिन-रात पढ़ाई करते हैं, लेकिन जब पेपर लीक की खबरें आती हैं, तो वे पूरी तरह टूट जाते हैं। पैरेंट्स ने रुंधे गले से कहा, "हमें हर वक्त यह डर सताता रहता है कि कहीं हमारा बच्चा तनाव में आकर कोई गलत कदम न उठा ले। हम रात-रात भर उठकर उनके कमरों में चेक करने जाते हैं कि वे ठीक तो हैं ना? सरकार को इस जानलेवा तनाव का समाधान ढूंढना ही होगा। भाषण के समापन पर राहुल गांधी ने देश के युवाओं को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "शिक्षा का असली मतलब यह होता है कि वह आपकी जेब से लाखों रुपए निकाले बिना, आपके सपनों को पूरा करने का माध्यम बने। हमें इस पूरे ढर्रे को बदलना होगा। मैं यहाँ आपके विचार जानने और इस बदलाव की नींव रखने आया हूं। इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रूपरेखा रही। अमूमन राजनीतिक रैलियों में मंच पर बड़े नेताओं का जमावड़ा होता है, लेकिन बुधवार को कोटा में नजारा उलटा था। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कांग्रेस के तमाम कद्दावर नेताओं को ग्राउंड में सबसे पीछे आम जनता के बीच बैठाया गया था। मंच पर केवल राहुल गांधी और छात्र थे। राहुल के मंच पर आने से पहले करीब डेढ़ घंटे तक एक मशहूर रैपर ने अपने गानों के जरिए युवाओं में जोश भरा और लाइव कंसर्ट का लुत्फ उठाने के बाद सीधे गंभीर मुद्दों पर संवाद शुरू हुआ।