फुल सियासी मूड में राहुल गांधीः मोदी सरकार को दिखाई ‘गांधीगिरी’! विपक्षी कुनबे के साथ हाथ में संविधान की प्रतियां लेकर देर रात गांधी स्मृति तक किया कूच

Rahul Gandhi in full political mode: Showed 'Gandhigiri' to the Modi government! Marched to Gandhi Smriti late at night alongside the opposition camp, holding copies of the Constitution.

नई दिल्ली। NEET परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर देशभर में उठे विरोध के बीच गुरुवार को राजधानी दिल्ली में सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर नया राजनीतिक संदेश देते हुए सड़क पर उतरने का फैसला किया। उनके नेतृत्व में INDIA गठबंधन के 120 से अधिक सांसद संविधान की प्रतियां हाथ में लेकर गांधी स्मृति तक मार्च के लिए निकले। विपक्ष ने इस पूरे कार्यक्रम को लोकतांत्रिक विरोध और छात्रों के समर्थन का प्रतीक बताया, जबकि पुलिस की रोक-टोक और भारी सुरक्षा व्यवस्था ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक राजनीतिक बना दिया।

दरअसल, गुरुवार को पहले से ही राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, टीएमसी की महुआ मोइत्रा, शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत, एनसीपी (शरद पवार) की सुप्रिया सुले, राजद की मीसा भारती, समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन, सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास समेत विभिन्न दलों के सांसद यहां पहुंचे। करीब 120 से अधिक सांसदों की मौजूदगी ने इस विरोध प्रदर्शन को विपक्ष के संयुक्त शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया। राहुल गांधी के आवास पर दो बसों की व्यवस्था की गई थी, जिनमें सवार होकर सभी सांसद गांधी स्मृति के लिए रवाना हुए।

कांग्रेस नेताओं के हाथों में संविधान की प्रतियां, पेपर लीक के खिलाफ पोस्टर और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वाले संदेश दिखाई दिए। कई सांसदों ने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और मीडिया की भारी मौजूदगी रही। हालांकि मार्च शुरू होने के कुछ ही समय बाद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने 30 जनवरी मार्ग पर भारी बैरिकेडिंग कर बसों को रोक दिया। सड़क पर सफेद बसें खड़ी कर मार्ग अवरुद्ध किया गया, जबकि मौके पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। कुछ समय तक पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक चलती रही। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा स्वयं बस से उतरकर पुलिस अधिकारियों से बातचीत करती नजर आईं, जबकि राहुल गांधी बस के भीतर से स्थिति पर लगातार नजर बनाए रहे। लंबे गतिरोध के बाद प्रशासन की ओर से सीमित अनुमति मिलने पर विपक्षी नेता गांधी स्मृति पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रगान गाया और छात्रों के समर्थन में अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

राहुल गांधी ने पूरे घटनाक्रम को छात्रों के संघर्ष से जोड़ते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य की है। उन्होंने कहा कि "हमारे छात्र सड़कों पर हैं और पुलिस की लाठियां खा रहे हैं। इसलिए विपक्ष के सभी सांसदों ने तय किया कि हमें भी उनके साथ सड़क पर उतरना चाहिए। संदेश साफ है कि भारत के छात्र अकेले नहीं हैं, पूरा विपक्ष उनके साथ खड़ा है।" कुल मिलाकर गुरुवार का यह प्रदर्शन केवल एक विरोध मार्च नहीं रहा, बल्कि राहुल गांधी की नई राजनीतिक रणनीति की झलक भी माना जा रहा है। संसद के भीतर सरकार को घेरने के साथ-साथ सड़क पर छात्रों के बीच जाकर आंदोलन का नेतृत्व करना कांग्रेस और INDIA गठबंधन की बदली हुई राजनीतिक शैली का संकेत माना जा रहा है।