राम मंदिर चंदा विवाद पर गरमाई सियासतः असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर साधा निशाना! बोले- ‘ट्रस्ट में मुसलमान होता तो, एनकाउंटर होता, फिर केस क्लोज’

Politics heats up over Ram Mandir donation controversy: Asaduddin Owaisi targets the government! Says, "If there were a Muslim in the trust, there would have been an encounter, and then the case woul

बिजनौर। यूपी के बिजनौर में आयोजित एक जनसभा के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी के मुद्दे को लेकर केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान ओवैसी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कोई मुसलमान सदस्य होता और उसके समय ऐसा मामला सामने आता, तो उसका एनकाउंटर कर दिया जाता, बुलडोजर से उसका घर गिरा दिया जाता और मामला वहीं खत्म कर दिया जाता। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। सोमवार को बिजनौर जिले में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने बिना किसी का नाम लिए भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट में गलती हुई है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि ट्रस्ट में कोई मुसलमान सदस्य होता, तो कथित घोटाला सामने आने के बाद उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होती, उसका एनकाउंटर कर दिया जाता, बुलडोजर से उसका मकान गिरा दिया जाता और पूरे मामले को बंद कर दिया जाता। अपने भाषण में ओवैसी ने ट्रस्ट के एक पदाधिकारी का नाम लेते हुए भी टिप्पणी की और कहा कि वर्तमान स्थिति में किसी के खिलाफ वैसी कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में आखिर क्या हो रहा है और कानून का समान रूप से पालन क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई हैए उन्हें पुलिस हिरासत में भी नहीं लिया गया। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा देश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से उठाया था। इसके बाद कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा और अब एआईएमआईएम ने भी इसे लेकर भाजपा पर हमला तेज कर दिया है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इस पूरे विवाद पर अलग रुख अपनाते हुए कहा है कि श्रीराम मंदिर से जुड़े किसी भी मामले पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।