राहुल गांधी के दौरे पर उत्तराखंड में सियासी संग्राम: कांग्रेस का तीखा पलटवार,कहा-व्याकुल पिता के आंसुओं को स्क्रिप्टेड बताने वाली भाजपा खो चुकी है संवेदनाएं'
देहरादून। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के देहरादून दौरे को लेकर उत्तराखंड की सियासत में उबाल आ गया है। राहुल गांधी के कार्यक्रम को 'स्क्रिप्टेड' (पहले से तय नाटक) बताए जाने पर कांग्रेस पार्टी ने सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने मोर्चा संभाला और भाजपा को पूरी तरह 'असंवेदनशील' करार दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कभी भी उस लाचार पिता के दर्द और भावनाओं को नहीं समझ सकते, जिसने अपनी होनहार बेटी को खो दिया है। उन्होंने खुलासा किया कि राहुल गांधी के मंच पर दिवंगत छात्रा रिया कुमारी थापा के पिता राजेश मल मौजूद थे। उन्होंने बेहद भारी मन और नम आंखों से अपनी बेटी के सपनों, उसकी दिन-रात की मेहनत और उसके संघर्ष को जनता के सामने बयां किया था। नीट के घाव पर सियासत: कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, पीड़ित पिता ने राहुल गांधी से अपनी दिवंगत बेटी समेत उन तमाम मासूम छात्रों के लिए न्याय की गुहार लगाई, जिन्होंने कथित नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद घोर निराशा में आकर अपनी जान गंवा दी। मंच पर जब एक पिता रो रहा था, तब भी भाजपा नेताओं का दिल नहीं पसीजा। जो दल एक पिता के आंसुओं को भी 'स्क्रिप्टेड' बता दे, उससे संवेदनशीलता की उम्मीद ही नहीं की जा सकती। भाजपा ने मृत बच्चों को श्रद्धांजलि देना तो दूर, उनके दर्द का क्रूर मजाक उड़ाया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि धामी सरकार और भाजपा ने राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को फ्लॉप करने और रोकने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया, लेकिन जनता और युवाओं के समर्थन ने इसे ऐतिहासिक रूप से सफल बना दिया। गरिमा दसौनी ने प्रशासन के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा खुलासा किया। कांग्रेस का आरोप है कि परेड ग्राउंड में राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने 'कानून व्यवस्था' का हवाला देकर अनुमति देने में आनाकानी की थी। कांग्रेस ने तंज कसा कि इसी परेड ग्राउंड में एक प्रसिद्ध पंजाबी गायिका के कार्यक्रम को तुरंत हरी झंडी दे दी गई। इतना ही नहीं, उस कार्यक्रम में युवाओं की भारी भीड़ जुटाने के लिए एंट्री तक मुफ्त (निशुल्क) कर दी गई थी। कांग्रेस ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि देहरादून में प्रशासनिक फैसले निष्पक्षता से नहीं, बल्कि पूरी तरह से सत्ता के राजनीतिक दबाव में लिए गए थे। इस वार-पलटवार के बाद देवभूमि की राजनीतिक फिजां पूरी तरह गर्मा गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।