संसद सत्र से पहले दिल्ली में बढ़ी सियासी हलचल: 3 अहम संशोधन विधेयकों पर आज मंथन करेगी जेपीसी

Political activity intensifies in Delhi ahead of the Parliament session: JPC to deliberate on 3 key amendment bills today.

नई दिल्ली। आगामी मानसून सत्र से पहले देश की राजधानी में विधायी प्रक्रियाओं और राजनीतिक रणनीतियों ने रफ्तार पकड़ ली है। तीन अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले संशोधन विधेयकों की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति बुधवार को नई दिल्ली स्थित संसद भवन के संलग्न भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक करने जा रही है। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली यह समिति इस समय केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन बड़े विधेयकों की सूक्ष्मता से जांच कर रही है, जिनका देश के संघीय ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में संविधान विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्र शासित प्रदेशों के शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 के विभिन्न कानूनी, संवैधानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। संसदीय एजेंडे के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इन विधेयकों पर विभिन्न हितधारकों से मौखिक साक्ष्य और विस्तृत ब्रीफिंग लेना है। समिति के सामने आंध्र प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, हैदराबाद की जानी-मानी संस्था 'फाउंडेशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' के विशेषज्ञ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष प्रतिनिधि उपस्थित होंगे। ये सभी प्रतिनिधिमंडल विधेयकों के मसौदे पर अपने-अपने विचार, आपत्तियां और सुझाव जेपीसी के समक्ष लिखित व मौखिक रूप से प्रस्तुत करेंगे।

राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेशों के शासन से जुड़े ये संशोधन सीधे तौर पर देश की आंतरिक सुरक्षा, स्वायत्तता और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े हैं। गौरतलब है कि इन तीनों विवादित और संवेदनशील विधेयकों को पिछले साल 20 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था। सदन में चर्चा और विपक्ष के सुझावों के बाद, सरकार ने इनकी गहन तकनीकी और कानूनी जांच के लिए इन्हें संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति (JPC) को सौंपने का फैसला किया था, ताकि कानून बनने से पहले सभी विसंगतियों को दूर किया जा सके। संसद भवन में केवल जेपीसी ही नहीं, बल्कि विभिन्न संसदीय स्थायी समितियां भी लगातार सक्रिय हैं। पिछले महीने नई दिल्ली में कॉर्पोरेट कानून, वित्त और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं। इस सिलसिले में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर देश के शीर्ष संस्थानों—इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, आईसीएसआई  और आईसीएमएआई के विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। इसके साथ ही, देश की आर्थिक और औद्योगिक रफ्तार बढ़ाने के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय , इन्वेस्ट इंडिया और एमएसएमई मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने भी अहम प्रस्तुतियां दीं। इन बैठकों में समिति के प्रमुख सदस्य सुधीर गुप्ता, संजय के झा और मगुंटा एस रेड्डी भी शामिल रहे। आगामी बैठकों के एजेंडे में ऊर्जा सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। विद्युत मंत्रालय और उत्तर पूर्वी विद्युत निगम लिमिटेड के अधिकारियों द्वारा एक विशेष सत्र में 'आत्मनिर्भर विद्युत क्षेत्र के विकास में वैधानिक निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका' विषय पर समिति को जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य देश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना और इस क्षेत्र में सरकारी उपक्रमों की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना है। जेपीसी की बुधवार की बैठक के बाद इन विधेयकों की अंतिम रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखने की तैयारी तेज हो जाएगी।