संसद का मानसून सत्र आज से: परिसीमन बिल पर सरकार को डीएमके का साथ! विपक्ष को झटका, दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा एनडीए 

Parliament's Monsoon Session begins today: DMK backs government on Delimitation Bill! A setback for the opposition; NDA nears two-thirds majority.

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र आज (सोमवार) से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इसके आगाज से ठीक पहले देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला है। विपक्षी गठबंधन को करारा झटका देते हुए संकेत मिले हैं कि बहुप्रतीक्षित परिसीमन बिल और महिला आरक्षण विधेयक पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम मोदी सरकार का साथ दे सकती है। यदि यह सियासी समीकरण हकीकत में बदलता है, तो केंद्र सरकार संसद में संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी। इसके साथ ही, आज सत्र के पहले ही दिन राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाले 'वंदे मातरम बिल' समेत पांच नए विधेयक पेश होने जा रहे हैं, जिससे सदन में भारी हंगामे के पूरे आसार हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस बड़े राजनीतिक समर्थन के बदले द्रमुक ने सरकार के सामने एक बड़ी शर्त रखी है, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। द्रमुक की मांग है कि देश के सभी राज्यों में आनुपातिक आधार पर 50 फीसदी सीटें बढ़ाई जाएं, ताकि लोकसभा सीटों के पुनर्गठन से दक्षिण भारत के राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कोई नुकसान न हो। दिलचस्प बात यह है कि इस मांग पर गृह मंत्री अमित शाह बजट सत्र के दौरान चर्चा में पहले ही सकारात्मक आश्वासन दे चुके थे। हालांकि, रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद इस मुद्दे पर विरोधाभासी बयान भी सामने आए। आरपीआई सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि द्रमुक परिसीमन विधेयक पर सरकार का समर्थन करने को तैयार हो चुकी है। वहीं, द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने इस पर फिलहाल सीधा पत्ता खोलने से इन्कार करते हुए कहा कि दक्षिण के राज्यों के हितों के खिलाफ पार्टी कोई समझौता नहीं करेगी और वे परिसीमन पर सरकार से और स्पष्टता चाहते हैं। लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पर्दे के पीछे सब कुछ तय हो चुका है। लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 544 है, जहां दो-तिहाई बहुमत साबित करने के लिए सरकार को 363 वोटों की आवश्यकता है। बाकी बचे 9 सांसदों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने चक्रव्यूह रच लिया है। सरकार इसके लिए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और यूपीपीएल समेत पूर्वोत्तर के दो अन्य दलों के संपर्क में है, जिनके पास कुल 8 सांसद हैं। इन्हें साधने के बाद सरकार जादुई आंकड़े से सिर्फ 1 वोट दूर रह जाएगी। सदन में मौजूद 7 निर्दलीय सांसदों में से किसी एक का साथ मिलना या फिर जेल में बंद सांसद इंजीनियर राशिद अथवा अमृतपाल सिंह की सदन में अनुपस्थिति इस फासले को आसानी से पाट देगी। सर्वदलीय बैठक में सरकार ने अहम विधेयकों को सुचारू रूप से पारित कराने के लिए विपक्ष से सहयोग मांगा है, लेकिन एजेंडे में शामिल नए विधेयकों को देखते हुए टकराव तय माना जा रहा है। सोमवार को सदन के पटल पर ये 5 नए विधेयक रखे जाएंगे। यह इस सत्र का सबसे विवादित और बड़ा बिल साबित हो सकता है। यह राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी और दन्नात्मक प्रावधानों से लैस है। गृह मंत्री अमित शाह इसे आज राज्यसभा में पेश करेंगे।

आयकर (संशोधन) विधेयक: सरकारी अध्यादेश की जगह लेने वाले इस बिल का मकसद विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना और कर्ज बाजार को मजबूत करना है। सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक: इस विधेयक के जरिए शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े अध्यादेश को स्थायी कानून का रूप दिया जाएगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक: एमएसएमई क्षेत्र में भुगतानों में देरी से संबंधित विवादों का तेजी से निपटारा करने के उद्देश्य से यह बिल लाया जा रहा है। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल: इस विधेयक के जरिए पंजीकरण की प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी व डिजिटल बनाया जाएगा। संसद सत्र के पहले ही दिन लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर 'संसद मार्च' का एलान किया गया है। सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने अस्पताल से ही प्रदर्शनकारियों की अगुवाई करने की घोषणा की है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने मार्च की इजाजत देने से साफ मना कर दिया है और नई दिल्ली इलाके में धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू कर जंतर-मंतर पर भारी किलेबंदी कर दी है।