एक शख्स...दो सरकारी नौकरियां!6 साल तक चलता रहा डबल सैलरी गेम,सरकारी कर्मचारी निकला डबल इंजन बाबू
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से सरकारी सिस्टम को चौंका देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक सरकारी कर्मचारी वर्षों तक दो अलग-अलग विभागों में नौकरी करता रहा और हैरानी की बात यह रही कि दोनों विभागों से बाकायदा वेतन भी उठाता रहा, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। मामले के सामने आते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के अनुसार योगेश चौधरी नामक कर्मचारी साल 2017 से सामाजिक न्याय विभाग में ‘समग्र सुरक्षा अधिकारी’ के पद पर तैनात है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। वर्ष 2018 में उसने अनुकंपा नियुक्ति के जरिए बिछुआ ब्लॉक के पटवारी हल्का नंबर 9 और 10, चौरापठार में पटवारी के रूप में भी ज्वाइनिंग ले ली। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले करीब छह वर्षों से वह दोनों विभागों में एक साथ सेवाएं देता रहा और दोनों जगह से वेतन भी लेता रहा।
सूत्रों के मुताबिक, दिन में वह राजस्व विभाग में पटवारी की जिम्मेदारियां निभाता था, जबकि दस्तावेजों में सामाजिक न्याय विभाग में भी उसकी उपस्थिति और सेवा जारी दिखाई जाती रही। यानी एक ही व्यक्ति सरकारी सिस्टम में दोहरी भूमिका निभाते हुए प्रशासन की आंखों में धूल झोंकता रहा।
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को नई सरकारी सेवा जॉइन करने से पहले पुरानी नौकरी से इस्तीफा देना अनिवार्य होता है और इसका उल्लेख सर्विस बुक में दर्ज किया जाता है। लेकिन इस मामले में न तो पहले विभाग से इस्तीफा दिया गया और न ही दूसरे विभाग को पहले से सरकारी सेवा में होने की जानकारी दी गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिला प्रशासन, विभागीय अधिकारी और कोषालय इतने वर्षों तक इस पूरे खेल से अनजान कैसे रहे?
अब यह मामला सामने आने के बाद सरकारी मॉनिटरिंग सिस्टम, वेतन सत्यापन प्रक्रिया और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है और लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर छह साल तक चल रहे इस ‘सरकारी डबल रोल’ का जिम्मेदार कौन है।