नैनीताल टू-व्हीलर टोल टैक्स विवाद: शहरी विकास मंत्री का बड़ा फैसला, टेंडर निरस्त करने और उच्चस्तरीय जांच के आदेश
नैनीताल में प्रस्तावित लेक ब्रिज (चुंगी) टू-व्हीलर टोल टैक्स को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार को टीआरसी में आयोजित बैठक में शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक, नगर पालिका सभासदों, बजरंग दल के पदाधिकारियों और नगर के प्रतिनिधियों ने पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए, जिसके बाद मंत्री ने विवादित टेंडर को निरस्त करने तथा पूरी टेंडर प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराने के आदेश दिए।
बैठक में बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक प्रदीप सिंह बोरा की ओर से शहरी विकास मंत्री को एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में लेक ब्रिज टोल निविदा में कई सुधारों की मांग उठाई गई।

इसमें कहा गया कि जिस प्रकार दोपहिया वाहनों को टोल से राहत दी गई है, उसी तरह चारपहिया वाहनों के लिए भी शुल्क व्यवस्था में संशोधन किया जाए। ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया कि अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए ₹200 और ₹300 की व्यवस्था के बजाय एक समान और पारदर्शी शुल्क लागू किया जाए, ताकि भ्रष्टाचार और मनमानी की आशंका समाप्त हो सके।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि पहले की तरह दो घंटे के लिए जारी होने वाली पर्ची की व्यवस्था दोबारा लागू की जाए, जिससे शहर में अल्प समय के लिए आने वाले लोगों और स्थानीय नागरिकों को राहत मिल सके।
इसके अलावा ज्ञापन में बाहरी ठेकेदारों के कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी चिंता जताई गई। मांग की गई कि ठेका दिए जाने से पहले संबंधित ठेकेदार से शपथ पत्र लिया जाए कि उसके कर्मचारी स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के साथ अभद्र व्यवहार नहीं करेंगे तथा उनके कार्यों का समय-समय पर सत्यापन भी कराया जाएगा।
बैठक के दौरान शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने स्पष्ट कहा कि यदि टेंडर नगर पालिका बोर्ड की स्वीकृति के बिना जारी किया गया और बोर्ड बैठक में अनुमोदन नहीं लिया गया, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने तत्काल विवादित टेंडर को निरस्त करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने पूरे मामले की जांच पूर्व आईएएस अधिकारी से कराने के आदेश भी दिए, ताकि टेंडर प्रक्रिया से लेकर अब तक हुई सभी प्रशासनिक कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच हो सके।
बैठक के दौरान मंत्री ने जिलाधिकारी से फोन पर भी बात की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बोर्ड की मंजूरी नहीं थी और मामला विवादित था, तो एसडीएम की मौजूदगी में टेंडर कैसे खोला गया। उन्होंने कहा कि यदि जनता और पत्रकार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं तो सरकार के पास भी हर सवाल का जवाब होना चाहिए।
बैठक में यह भी बताया गया कि पहले लिखित आश्वासन दिया गया था कि टेंडर में मौजूद सभी कमियों को दूर कर प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बावजूद टेंडर खोले जाने से पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शहरी विकास मंत्री ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि नियमों के उल्लंघन या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।