नैनीताल: आदर्श रामलीला कमेटी में पिछले दस सालों से रावण का किरदार निभा रहे हैं रोहित वर्मा! दर्शक बेसब्री से करते हैं रावण बने रोहित का इंतेज़ार
नैनीताल। रामायण में एक पात्र ऐसा है, जो अगर न होता तो शायद रामायण भी न होती। न सीता हरण होता, न राम रावण युद्ध होता और ना ही असुरों को मोक्ष मिलता। यह पात्र है रावण का, जो कलाकारों को उतना ही आकर्षित करता है, जितना राम का पात्र आकर्षित करता है। ज्ञानी, शिव का अनन्य भक्त रावण की दमदार हंसी, किरदार में हनक, विशाल भुजाएं, रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज़, ऐसा काफी कुछ रावण में है जिसे रामलीला के मंच में उतारना हर कलाकार के बस की बात नहीं है।
नैनीताल की आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में पिछले दस वर्षों से रोहित वर्मा रावण की भूमिका निभा रहे हैं। रोहित एक ब्लॉगर और एक्टर हैं जो पिछले कई वर्षों से थियेटर से जुड़े हैं। रोहित कहते हैं कि रावण की भूमिका उन्हें शुरू से ही आकर्षित करती है,रामायण में राम के बाद रावण का पात्र ही सबसे दमदार है साथ रावण की भूमिका काफी चुनौतीपूर्ण भी है। डॉयलाग से लेकर चलने, उठने, बैठने सभी में राजसी ठसक है। उसकी हंसी और गुस्सा दोनों दमदार है।
रोहित कहते हैं कि रामायण में रावण की भूमिका सनातन धर्म की उस आस्था को आज भी प्रासंगिक करती है कि आदमी को अहंकार ले डूबता है,जबकि रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ ब्रह्म ज्ञानी और बहु-विद्याओं का जानकार था। रावण ने भगवान शिव पर प्रसन्न होकर शिव तांडव स्त्रोत्र की रचना की,रावण को छह दर्शन और चारों वेदों का ज्ञाता माना जाता है, इसीलिए उसे 'दसकंठी' भी कहा जाता है।
रावण मायावी भी था वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। उसके पास एक ऐसा विमान था, जो अन्य किसी के पास नहीं था।शायद यही सब उसे अहंकारी बनाते हैं। रोहित लगातार दस वर्षों से सूखाताल की रामलीला में रावण का किरदार निभा रहे हैं इसके लिए वो आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गोपाल सिंह रावत,महासचिव रितेश साह सहित सभी सदस्यों का आभार प्रकट करते हैं।