नैनीताल:देहरादून भूमि विवाद! ग्रामीणों की खेती योग्य जमीन आईटीबीपी को देने पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकार से मांगा जवाब
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून जिले के ग्राम खैरी मानसिंह में ग्रामीणों की भूमि आईटीबीपी को सौंपे जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य और केंद्र सरकार सहित इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) से जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही न्यायालय ने याचिकाकर्ता को भी प्रतिउत्तर दाखिल करने को कहा है। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की है।
मामले के अनुसार, देहरादून के मालदेवता क्षेत्र स्थित ग्राम खैरी मानसिंह के निवासी नंद किशोर ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने ग्रामीणों की सहमति के बिना उनकी कृषि योग्य भूमि आईटीबीपी को हस्तांतरित कर दी।
याचिका में कहा गया है कि भूमि हस्तांतरण के शुरुआती चरण में ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन बाद में आईटीबीपी द्वारा गांव से घरों और खेतों तक जाने वाले पारंपरिक रास्तों को बंद कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अपने खेतों और आवास तक जाने से रोका जा रहा है, जिससे उनके दैनिक जीवन और आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, आईटीबीपी अधिकारियों, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को कई बार ज्ञापन सौंपे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।स्थिति से परेशान होकर ग्रामीणों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन भी किया। इसके बावजूद जब प्रशासनिक स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो अंततः ग्रामीणों को न्याय की मांग के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।