उत्तराखंड पर आफत बनकर टूटेगा मानसून: अगले 3 दिन भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी, मौसम विभाग का 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा और बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने प्रदेशवासियों और पर्यटकों के लिए एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, 9 अगस्त से 11 अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मूसलाधार और आफत की बारिश होने के प्रबल आसार हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कई जिलों के लिए 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर मुश्किलें बढ़ाने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 9 से 11 अगस्त तक तीन दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है। पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और मलबा आने से सड़क मार्ग प्रभावित होने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार 9 अगस्त को देहरादून, पिथौरागढ़, चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में भारी बारिश की संभावना है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। अन्य जिलों में भी कहीं-कहीं तेज बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। बारिश का असर 10 अगस्त को और बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की संभावना है। 11 अगस्त को भी मौसम का मिजाज खराब रहने की संभावना है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर के कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान निचले क्षेत्रों में जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ सकती हैं। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों और बरसाती गदेरों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। पहाड़ी मार्गों पर चट्टान गिरने, भूस्खलन और मलबा आने से सड़कें, राष्ट्रीय राजमार्ग और पुल बाधित हो सकते हैं। ऐसे में यात्रियों को मौसम की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि बारिश के कारण सड़क बंद होने या किसी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू किया जा सके।