उत्तराखण्ड हाईकोर्ट का बड़ा फैसलाः जीएसटी मामलों में चार माह से अधिक देरी होने पर अपील नहीं होगी स्वीकार! लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 भी नहीं होगी लागू

Major ruling by Uttarakhand High Court: Appeals in GST cases will not be accepted if delayed by more than four months! Section 5 of the Limitation Act will not apply.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि जीएसटी अधिनियम की धारा 107 के तहत दायर अपील निर्धारित तीन माह की अवधि तथा अधिकतम एक माह की विलंब-क्षम्य अवधि (कुल चार माह) के बाद स्वीकार नहीं की जा सकती। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जीएसटी अधिनियम एक विशेष एवं स्वःनिहित कानून है, इसलिए ऐसी अपीलों पर विलंब माफी के लिए लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं होगी। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में अपील केवल विलंब के आधार पर खारिज हुई है, उन प्रत्येक रिट याचिकाओं के तथ्यों की अलग-अलग समीक्षा कर यह तय किया जाएगा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मूल आदेश की वैधता की जांच की जानी चाहिए या नहीं। बता दें कि राजेश उप्रेती और अन्य 50 से अधिक याचिकाकर्ता द्वारा याचिका दायर कर कहा है कि जीएसटी अधिनियम की धारा 107 के तहत दायर अपील निर्धारित तीन माह की अवधि तथा अधिकतम एक माह की विलंब-क्षम्य अवधि (कुल चार माह) के बाद भी लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू होनी चाहिए और इनकी सुनवाई जीएसटी एक्ट में ऑथराइज्ड अथॉरिटी द्वारा की जानी चाहिए।