एलओसी पर बड़ा हादसा: उरी के कमलकोट में ब्लास्ट, दो जांबाज जवान शहीद
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास एक बेहद दर्दनाक और दुखद हादसा सामने आया है। उरी के कमलकोट इलाके में एलओसी के अग्रिम मोर्चे पर हुए एक आकस्मिक विस्फोट में भारतीय सेना के दो बहादुर जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्होंने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करते हुए इन दोनों जांबाज सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इस दुखद घटना के बाद पूरी सेना और शहीद जवानों के पैतृक गांवों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।
जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना मंगलवार देर शाम की है। नियंत्रण रेखा के बेहद संवेदनशील और अग्रिम इलाके कमलकोट में सेना के जवान अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे और मुस्तैदी से सीमाओं की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकी चपेट में आने से ड्यूटी पर तैनात दो जवान गंभीर रूप से झुलस गए और लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। विस्फोट की आवाज सुनते ही आसपास के सैन्य कैंपों में हड़कंप मच गया। तुरंत त्वरित प्रतिक्रिया टीम मौके पर पहुंची और दोनों घायल जवानों को घटनास्थल से बाहर निकाला। आपातकालीन प्राथमिक उपचार देने के बाद, दोनों जवानों को बेहद नाजुक हालत में तुरंत हवाई मार्ग से श्रीनगर के बादामीबाग स्थित सेना के प्रतिष्ठित 92 बेस अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल लाते ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दोनों जांबाज सैनिकों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास शुरू कर दिए। उन्हें आईसीयू में रखकर हर संभव चिकित्सा सहायता दी गई। हालांकि, विस्फोट के कारण जवानों को आई चोटें इतनी गहरी और गंभीर थीं कि तमाम कोशिशों और आधुनिक चिकित्सा के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बाद भी दोनों वीर जवानों ने दम तोड़ दिया और वीरगति को प्राप्त हुए। दोनों ही जवान बेहद अनुशासित, जांबाज और देश सेवा के जज्बे से ओतप्रोत थे। उनके शहीद होने की खबर जैसे ही उनके गृह राज्यों और परिवारों तक पहुंची, वहां कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे इलाके में गम और गर्व का मिला-जुला माहौल है। स्थानीय प्रशासन और सैन्य अधिकारी शहीदों के पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव भेजने की तैयारियों में जुट गए हैं, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह आकस्मिक विस्फोट किस वजह से हुआ, इसकी सटीक प्रकृति और कारणों का पता लगाने के लिए सेना के उच्च अधिकारियों ने विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। सैन्य विशेषज्ञ घटना के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि नियंत्रण रेखा के कमलकोट जैसे अग्रिम और संवेदनशील क्षेत्रों में अक्सर पुरानी बारूदी सुरंगों (Landmines) या जमीन में दबे पुराने अनफटे आयुधों के फटने का खतरा हमेशा बना रहता है। मौसम के उतार-चढ़ाव और मिट्टी खिसकने के कारण कई बार ये सुरंगें अपनी जगह से शिफ्ट हो जाती हैं, जो गश्त कर रहे जवानों के लिए एक अदृश्य और बड़ी चुनौती साबित होती हैं। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हमारे सैनिक किन कठिन और जानलेवा परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। इन दोनों जवानों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को यह कृतज्ञ राष्ट्र हमेशा याद रखेगा और उन्हें सलाम करेगा।