बदरीनाथ धाम के चढ़ावे को लेकर बढ़ा विवाद: मंदिर परिसर में उपवास पर बैठे कांग्रेस विधायक, 40 दिन के सीसीटीवी फुटेज से खुलेंगे राज
देहरादून। भू-वैकुंठ और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के परम केंद्र भगवान बदरीनाथ मंदिर के दान-चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक तूफान में बदल चुका है। दो जुलाई को सामने आई इस वित्तीय अनियमितता के विरोध में स्थानीय कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बदरीनाथ मंदिर परिसर में ही अनिश्चितकालीन उपवास (मौन विरोध) पर बैठ गए हैं। विधायक ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने और इसमें शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इस बीच, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और जांच एजेंसियों ने मामले की गहराई तक जाने के लिए मंदिर परिसर की पिछले 40 दिनों की सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह हेराफेरी पहली बार हुई थी या फिर आस्था के इस पावन धाम में लंबे समय से यह खेल चल रहा था? सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले का खुलासा मंदिर परिसर में हाल ही में लगाए गए नए सुरक्षा कैमरों की वजह से हुआ है। बदरीनाथ मंदिर परिसर में बीते एक जुलाई से ही नए हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाने का काम शुरू किया गया था। कैमरे लगने के ठीक अगले ही दिन यानी दो जुलाई को दान-चढ़ावे की गणना के दौरान एक बड़ा संदिग्ध घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया। मंदिर परिसर में कुल 32 सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं। इनमें से एक मुख्य कैमरे की फुटेज में आरोपी अधिकारी अपने मोबाइल फोन के पास कुछ संदिग्ध वस्तु/नकदी रखते हुए साफ दिखाई दे रहा है। जांच टीम अब पुराने और नए दोनों ही कैमरों की कड़ियों को जोड़ रही है ताकि सच्चाई को पूरी तरह बेनकाब किया जा सके।
इस पूरे विवाद ने मंदिर समिति के प्रशासनिक प्रबंधन और कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। नियमानुसार, दान और चढ़ावे की गणना के लिए बीकेटीसी छह सदस्यीय एक विशेष टीम का गठन करती है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों ही शीर्ष अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त (Retire) हो चुके थे। उनके रिटायर होने के बावजूद प्रबंधन ने दो जुलाई जैसी महत्वपूर्ण दान गणना के लिए उनकी जगह किसी अन्य जिम्मेदार अधिकारी की तत्काल नियुक्ति नहीं की। इसी प्रशासनिक शून्यता का फायदा उठाते हुए दो जुलाई को हुई गणना में आरोपी अधिकारी की भूमिका सबसे सर्वेसर्वा और प्रमुख हो गई, जिससे उसे इस कथित हेराफेरी को अंजाम देने का खुला मौका मिल गया। बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए चढ़ावे की गणना स्थल (काउंटिंग रूम) के सीसीटीवी कैमरों की पिछले 40 दिनों की फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया है। जांच टीम अब एक-एक दिन की फुटेज का बारीकी से वैज्ञानिक परीक्षण कर रही है। यदि इस 40 दिन के भीतर किसी अन्य दिन भी कोई अनियमितता या किसी अन्य कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी तत्काल मुकदमा दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। भगवान के दरबार में आने वाले चढ़ावे को संभालने की एक बेहद पारदर्शी और कड़ी प्रक्रिया निर्धारित है, जिसे इस प्रकार समझा जा सकता है। सबसे पहले चढ़ावे में आए सोने और चांदी को अलग किया जाता है। यदि सोना-चांदी भारी मात्रा में हो, तो उसकी प्रामाणिकता जांचने के लिए अधिकृत सोनार को बुलाया जाता है। सोने-चांदी को अलग-अलग पोटलियों में बांधकर, उस पर तारीख और सामग्री का पूरा विवरण दर्ज कर सील किया जाता है। नकदी की गिनती मुख्य खजांची की मौजूदगी में होती है, जिसे सीधे बैंक कर्मियों को सौंपकर उसकी रसीद ली जाती है। इतनी कड़ी प्रक्रिया के बावजूद यदि कोई अधिकारी कैमरे के सामने हेराफेरी करने का दुस्साहस करता है, तो यह कूट कूट कर भरे भ्रष्टाचार या फिर प्रशासनिक शह की ओर इशारा करता है। उपवास पर बैठे विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि बदरीनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहाँ के चढ़ावे की पाई-पाई का उपयोग जनहित और मंदिर के विकास में होना चाहिए। यदि मंदिर के भीतर ही बैठे रसूखदार लोग इस तरह की लूट मचाएंगे, तो भक्तों का विश्वास टूट जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई नहीं हुई और पर्दे के पीछे के 'आकाओं' को बेनकाब नहीं किया गया, तो यह आंदोलन पूरे उत्तराखंड में उग्र रूप धारण करेगा।