श्रीलंका की तरह बर्बाद होने की कगार पर पाकिस्तान!डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपया 197.80 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचा, भारतीय 39 पैसे के बराबर हुआ पाकिस्तान का एक रुपया!

कंगाली में आटा गीला!ये कहावत आज पाकिस्तान पर सटीक बैठती है। श्रीलंका के बाद अब पाकिस्तान की हालत खस्ता हो गयी है। भारतीय 39 पैसे के बराबर पाकिस्तान का एक रुपया हो गया अमेरिकी डॉलर की बात करे तो एक डॉलर पाकिस्तान के 199 रुपये के बराबर हो गया है। पाकिस्तान की तेज़ी से गिरती अर्थव्यवस्था संभाले नही सम्भल रही है। पाकिस्तानी मीडिया की माने तो अब चीन भी पाकिस्तान की मदद नही कर रहा है।नए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब से कर्ज चुकाने की मोहलत को आगे बढ़ाने की गुजारिश कर चुके है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवंबर 2021 में तत्कालीन इमरान सरकार के रहते ही पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 50 हज़ार करोड़ रह गया था,रिपोर्ट्स ये भी बताती है कि तब इमरान खान सरकार ने सऊदी अरब से 6 महीनों के लिए आर्थिक मदद ली थी,जिसे अब तक चुकाया नही गया।कर्ज और बढ़ता गया और अब हालात ये हो चुके है कि पाकिस्तान को सऊदी अरब से कर्ज चुकाने की और मोहलत मांगनी पड़ रही है।

पाकिस्तान वित्त मंत्रालय के मुताबिक दालों, कच्चे तेल, खाद्य तेल इत्यादि की बढ़ती कीमतों की वजह से पाकिस्तान आर्थिक संकट में आ गया। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो गयी है कि चीन के साथ सीपीईसी के तहत चल रहे कई प्रोजेक्ट्स तक पूरे नही हो पाए।चीन का ड्रीम प्रोजेक्ट चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर फ़िलहाल लटक गया है।
ग्लोबल स्ट्रैट व्यू' की रिपोर्ट के मुताबिक चीन से मिलने वाली सबसे बड़ी आर्थिक सहायता पाकर दो देशों की अर्थव्यवस्था में उछाल आने के बजाय वह वैश्विक आर्थिक संकट का सबसे बड़ा शिकार बन गए। वह भी तब जब यह वैश्विक आर्थिक संकट भी चीनी लैब में सृजित कोरोना संक्रमण की ही देन है। पाकिस्तान और श्रीलंका के अलावा चीन ने वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया,मेडागास्कर, मालदीव और ताजिकिस्तान जैसे देशों को भी बेहिसाब कर्ज दे रखा है, जो अब भी नहीं संभले तो उनका भविष्य भी पाकिस्तान और श्रीलंका जैसा हो सकता है।
विश्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीन की कर्ज के जाल में फांसने की नीति पूरे विश्व में एक पैटर्न बना रही है। चीन के हर सुख-दुख का साथी पाकिस्तान इसका एक उदाहरण भर है। चीन अब तक दस देशों को अपना सबसे बड़ा कर्जदार बना चुका है। पाकिस्तान ने अपना सबसे ज्यादा कर्ज चीन से ही लिया था। चीन-पाकिस्तान आर्थिक कारिडोर प्रोजेक्ट का मकसद पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट से जोड़ना है। यह परियोजना चीन के प्रमुख प्रोजेक्ट बीआरआइ से ओतप्रोत है।