जेएसएससी की परीक्षा व्यवस्था का अनोखा कारनामा: परीक्षा खत्म होने के बाद अभ्यर्थियों को भेजे एडमिट कार्ड, भड़के युवा
रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) एक बार फिर अपनी परीक्षा व्यवस्था को लेकर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि 19 जुलाई को आयोजित 'झारखंड फील्ड वर्कर प्रतियोगी परीक्षा-2024' के एडमिट कार्ड कई अभ्यर्थियों को परीक्षा समाप्त होने के अगले दिन ईमेल के जरिए भेजे गए। इस कथित तकनीकी और प्रशासनिक चूक के कारण दर्जनों अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल ही नहीं हो सके। घटना सामने आने के बाद छात्रों में भारी आक्रोश है और आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा से पहले कई बार आयोग की वेबसाइट और पोर्टल पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें न तो लिंक मिला और न ही कोई सूचना। परीक्षा समाप्त होने के बाद 20 जुलाई की सुबह जब उनके ईमेल पर एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का संदेश पहुंचा तो वे हैरान रह गए। अभ्यर्थी तुषार दुबे ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की पूरी तैयारी की थी और समय पर प्रवेश पत्र पाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि परीक्षा खत्म होने के अगले दिन सुबह 10:10 बजे उन्हें आयोग की ओर से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का ईमेल प्राप्त हुआ। इसी तरह अभ्यर्थी मयंक कुमार ने बताया कि उन्हें भी 20 जुलाई सुबह 9:54 बजे ईमेल मिला, जबकि परीक्षा एक दिन पहले ही संपन्न हो चुकी थी। मयंक ने इस संबंध में आयोग को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों ने भी आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रांची विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य और छात्र नेता अटल पांडे ने दावा किया कि यह समस्या केवल दो-चार छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि दर्जनों अभ्यर्थियों ने उनसे संपर्क कर यही शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि यदि यह तकनीकी गड़बड़ी है तो इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और यदि अधिकारियों की लापरवाही है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। छात्र नेताओं का आरोप है कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उनका कहना है कि सरकार को जेएसएससी की परीक्षा प्रणाली और तकनीकी व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर दोषियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस पूरे मामले में जब जेएसएससी के अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई तो आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। आयोग की चुप्पी ने अभ्यर्थियों की नाराजगी और बढ़ा दी है। छात्रों का कहना है कि महीनों की मेहनत और तैयारी आयोग की एक बड़ी चूक की भेंट चढ़ गई। अब प्रभावित अभ्यर्थियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तकनीकी खामी की वजह सार्वजनिक की जाए और जिन अभ्यर्थियों को समय पर एडमिट कार्ड नहीं मिला, उन्हें दोबारा परीक्षा देने का अवसर दिया जाए। फिलहाल यह मामला झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और जेएसएससी के अगले कदम पर टिकी हैं।