परीक्षा केंद्रों में मिली पेपर लीक गिरोह की हिस्सेदारी: 5 राज्यों में फैला नेटवर्क, एसटीएफ जांच में बड़ा खुलासा
नोएडा। एसएससी समेत ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। नोएडा एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिर्फ अभ्यर्थियों तक नकल की तकनीक पहुंचाने तक सीमित नहीं था, बल्कि कुछ परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों और व्यवस्थाओं तक भी इसकी पहुंच होने की आशंका है। गिरोह से जुड़े आरोपी परीक्षा केंद्रों की कंप्यूटर व्यवस्था, तकनीकी सिस्टम और निगरानी तंत्र की जानकारी जुटाकर नकल कराने की रणनीति तैयार करते थे। 31 जुलाई को गिरफ्तार किए गए आरोपी लोकेश से पूछताछ में एसटीएफ को कई अहम सुराग मिले हैं। उसके पास से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद हुई थीं। जांच के मुताबिक लोकेश वर्ष 2017 से इन स्क्रीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सक्रिय नकल गिरोहों को उपलब्ध करा रहा था। अब तक की जांच में नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
एसटीएफ के अनुसार, अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने के लिए गिरोहों की जरूरत अलग होती थी। उसी हिसाब से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को मॉडिफाई कर तैयार किया जाता था। इससे जांच एजेंसी को आशंका है कि यह कोई अस्थायी या छोटा गिरोह नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित कारोबार था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि वर्ष 2017 से अब तक कितनी परीक्षाओं में इन उपकरणों का इस्तेमाल हुआ और कितने अभ्यर्थियों तक यह तकनीक पहुंची। जांच की एक अहम कड़ी परीक्षा केंद्रों तक पहुंच गई है। एजेंसी उन केंद्रों के कर्मचारियों, तकनीकी स्टाफ और पूर्व कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जहां नकल या संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें सामने आई थीं। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि इन केंद्रों से जुड़े किसी व्यक्ति का गिरोह के आरोपियों से संपर्क था या नहीं। यदि किसी परीक्षा केंद्र की तकनीकी व्यवस्था या अंदरूनी जानकारी गिरोह तक पहुंचने की पुष्टि होती है तो जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है। नॉलेज पार्क स्थित एक परीक्षा केंद्र में 22 मई 2026 को एसएससी ऑनलाइन परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल कराने की कोशिश का खुलासा हुआ था। आरोप है कि प्रॉक्सी सर्वर और सर्वर हैकिंग के जरिए परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। मामले में शुरुआत में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद इंद्रजीत उर्फ योगी से पूछताछ में अलवर निवासी लोकेश का नाम सामने आया। लोकेश की गिरफ्तारी के बाद बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने जांच को नया मोड़ दे दिया। अब एसटीएफ यह मिलान कर रही है कि लोकेश ने किस समय किस गिरोह को उपकरण उपलब्ध कराए और उस अवधि में संबंधित राज्यों में कौन-कौन सी ऑनलाइन भर्ती या प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित हुई थीं। एसटीएफ अब दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा समेत कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इन मॉडिफाइड स्क्रीन के इस्तेमाल की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि 92 बरामद स्क्रीन के अलावा कितने उपकरण तैयार किए गए और किन-किन गिरोहों या लोगों को सप्लाई किए गए। जांच के केंद्र में कई सवाल हैं 2017 से अब तक कितनी परीक्षाएं प्रभावित हुईं, पांच राज्यों में सक्रिय छह से अधिक गिरोहों तक उपकरण कैसे पहुंचे, परीक्षा केंद्रों के भीतर नेटवर्क के संपर्क कौन थे और कितने अभ्यर्थियों ने इस तकनीक का इस्तेमाल किया। एसटीएफ एसपी राजकुमार मिश्र ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता प्रभावित करने वाले इस संगठित नेटवर्क की जांच जारी है। जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।