चांद पर भारत की छाप!चंद्रयान से निकले प्रज्ञान रोवर के पहियों ने चांद पर छोड़ी इसरो के लोगो और राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ की अमिट छाप

India's imprint on the Moon! Wheels of Pragyan Rover left from Chandrayaan made an indelible impression of ISRO's logo and national symbol Ashoka Pillar

23 अगस्त 2023 भारत के लिए पूरी दुनिया मे छा जाने की तारीख के रूप में दर्ज हो गया है। भारत के इसरो द्वारा चांद के दक्षिणी ध्रुव में भेजे गए चंद्रयान 3 की 40 दिन के बाद सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब सब की नजर प्रज्ञान रोवर पर टिकी है। 23 अगस्त की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रयान चांद की सतह पर उतरा था,इसके दो घंटे और 26 मिनट बाद रोवर भी इससे बाहर आ गया. रोवर छह पहियों वाला रोबोट है,जो कि महज 26 किलो है।  यह चंद्रयान-3 मिशन का कम्युनिकेशन-इन-चीफ है चंद्रमा पर की गई खोज को प्रज्ञान ही धरती तक भेजेगा, यह रेक्टेंगुलर शेप में हैं। रोवर का इलेक्ट्रिक सिस्टम सोलर एनर्जी से संचालित है। खास बात ये है कि रोवर चांद पर भारत के वो निशान छोड़ेगा,जो सदियों तक कोई मिटा नही पायेगा। जी हां रोवर के पिछले दो पहियों पर इसरो का लोगो (Logo)और देश का राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ अंकित है। जैसे जैसे रोवर चांद की सतह पर आगे बढ़ेगा वैसे वैसे भारत की अमिट छाप भी छोड़ता रहेगा। 


रोवर की मिशन लाइफ 1 लूनर डे है, चांद पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है। पृथ्वी के 14 दिनों तक रोवर चांद की सतह पर महत्वपूर्ण खोज करेगा और लगातार भारत को वहां की तस्वीरों को भेजता रहेगा। इससे भारत के पास चांद के दक्षिणी ध्रुव की वो महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित होगी जो आजतक दुनिया मे किसी के पास नही है। रोवर चांद की सतह पर मौजूद केमिकल्स की मात्रा और गुणवत्ता की डीप स्टडी करेगा।

इसके अलावा प्रज्ञान पर दूसरा पेलोड है अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (Alpha Particle X-Ray Spectrometer - APXS). यह एलिमेंट कंपोजिशन की स्टडी करेगा. जैसे- मैग्नीशियम, अल्यूमिनियम, सिलिकन, पोटैशियम, कैल्सियम, टिन और लोहा, इनकी खोज लैंडिंग साइट के आसपास चांद की सतह पर की जाएगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

नोट:पोस्ट में जो तस्वीरे लगाई गई है केवल सांकेतिक तस्वीरे है।